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सोमवार, 02 फ़रवरी, 2004 को 12:27 GMT तक के समाचार
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'दुबे कांड' के दो संदिग्धों की 'आत्महत्या'

सत्येंद्र दुबे
सत्येंद्र दुबे ने भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था
इंजीनियर सत्येंद्र दुबे हत्या कांड के दो संदिग्ध लोगों की बिहार के गया ज़िले में रविवार रात को मौत हो गई है.

इन दोनों के परिवारों ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने उन्हें ज़हर देकर मार दिया है.

इन परिवारों ने सोमवार को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है जिसमें यह आरोप लगाया गया है.

रविवार को जब इन दोनों की मौत हुई तो परिवार के कुछ लोगों ने कहा था कि उन दोनों ने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली है.

दूसरी तरफ़ समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई ने इन आरोपों से इनकार किया है कि उन दोनों संदिग्धों ने जाँच के दौरान प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली.

इन संदिग्धों से सत्येंद्र दुबे की हत्या के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पूछताछ कर रही थी.

सीबीआई का कहना है कि उसने इन दोनों संदिग्धों को 31 जनवरी को ही पूछताछ के बाद छोड़ दिया था इसलिए 25 घंटे बाद किसी की मौत के लिए सीबीआई को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने दिल्ली में पीटीआई को बताया, "हम पूछताछ के दौरान किसी को भी प्रताड़ित नहीं करते हैं और मुख्यतः सवालों के ज़रिए ही जाँच पड़ताल की जाती है."

ग़ौरतलब है कि इंजीनियर सत्येंद्र दुबे ने स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी.

सत्येंद्र दुबे की पिछले साल 27 नवंबर को हत्या कर दी गई थी.

पुलिस का कहना है कि मुक़द्दर पासवान और शिवनाथ साव ने ज़हर खा लिया और दोनों की मौत अपने-अपने घर में हुई.

मुक़द्दर पासवान और शिवनाथ साव दोनों ही बजरंग दल के सदस्य थे.

इस बीच बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इन लोगों की मौत के मामले की पूरी जाँच की माँग की है जिससे पता चल सके कि उन्होंने आत्महत्या की या उनकी हत्या हुई है.

लालू प्रसाद यादव ने कहा कि चूँकि दोनों ही बजरंग दल से जुड़े थे, इसलिए हो सकता है कि सत्येंद्र दुबे की हत्या में बजरंग दल का हाथ रहा हो.

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने पटना में पत्रकारों से कहा कि इस मामले का एक अन्य प्रमुख गवाह एक रिक्शाचालक भी ग़ायब है.

सत्येंद्र दुबे ने स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था और अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया था.

लेकिन उनका नाम बाहर आ गया था और उसके बाद ही 27 नवंबर को उनकी हत्या कर दी गई थी.

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