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शुक्रवार, 07 सितंबर, 2007 को 11:39 GMT तक के समाचार
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मेघालय में यूरेनियम खनन की योजना

यूरेनियम अयस्क
देश का कुल 16 फ़ीसदी यूरेनियम मेघालय में है
भारत में पूर्वोत्तर के मेघालय राज्य में मौज़ूद 16 फ़ीसदी यूरेनियम के भंडार देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में बेहद अहम साबित हो सकते हैं.

इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार की यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने यूरेनियम के खनन और उसके प्रसंस्करण के लिए मेघालय की पश्चिमी खासी हिल्स में यूरेनियम प्लांट स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है.

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री पृथ्वीराज चौहान ने गुरूवार को संसद में लिखित जवाब में बताया कि मेघालय में बंगलादेश की सीमा से सटे पश्चिमी खासी हिल्स के केलंग, पेनदेंगशोहियांग तथा मावथापा में प्लांट लगाने का प्रस्ताव है.

उन्होंने कहा “देश के सामने ऊर्जा की चुनौतियां हैं ऐसे में अपने यहां मौजूद यूरेनियम भंडारों का उपयोग करना प्राथमिकता है, और इसके लिए सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों से अनुमति हासिल करने की प्रक्रिया जारी है.”

उन्होंने कहा कि परियोजना के संबंध में लोगों की चिंताओं और पर्यावरण के पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

विरोध

देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों के मद्देनज़र भारत ने हाल में अमरीका के साथ भी परमाणु करार किया है. हालांकि उसे लेकर देश में आंतरिक विरोध भी है.

 देश के सामने ऊर्जा की चुनौतियां हैं ऐसे में अपने यहां मौजूद यूरेनियम भंडारों का उपयोग करना प्राथमिकता है, और इसके लिए सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों से अनुमति हासिल करने की प्रक्रिया जारी है
पृथ्वीराज चौहान, राज्यमंत्री

मेघालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस परियोजना के संबंध में लोगों के बीच एक अध्ययन करके इसकी रिपोर्ट हाल में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को सौंपी है. मंत्रालय से इस परियोजना को मंजूरी अभी नहीं मिली है.

यूरेनियम प्लांट को लेकर मेघालय के कुछ स्थानीय लोग भी विरोध कर रहे हैं. वहाँ के आदिवासियों का कहना है कि रेडियोधर्मी पदार्थ यूरेनियम से निकले विकिरण से लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा.

इस तरह से यूरेनियम कॉर्पोरेशन की 400 करोड़ रूपये की परियोजना पर भी संशय बरकरार है.

यूरेनियम कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी का कहना है, “हम जब भी इन यूरेनियम भंडारों की तरफ जाते हैं, आदिवासी लोग तीर-कमान लेकर उनकी जान को खतरा बन जाते हैं. वह हमें अपना दुश्मन समझते हैं.”

कॉर्पोरेशन का कहना है कि एक बार यह परियोजना शुरू हो जाने के बाद इलाके में आधारभूत विकास होगा, लेकिन जनजातीय लोग इस तर्क से सहमत नहीं हैं.

इसके अलावा इन भंडारों का भूमि विवाद भी एक कारण है. दरअसल पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्यों की तरह मेघालय में भी भूमि का मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति का नहीं होकर सामूहिक होता है.

 हम जब भी इन यूरेनियम भंडारों की तरफ जाते हैं, आदिवासी लोग तीर-कमान लेकर उनकी जान को खतरा बन जाते हैं. वह हमें अपना दुश्मन समझते हैं
यूसीआईएल, एक अधिकारी

यह भूमि अधिकार स्वायत्त ज़िला परिषदों के पास होता है. केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि वो खासी जिला परिषद से लेकर मेघालय सरकार से परियोजना को शुरू करने को लेकर बातचीत कर रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले तो राज्य सरकार खनन को राज़ी भी हो गई थी, लेकिन जब कारपोरेशन ने वहां खुदाई शुरू की तो खासी जिला परिषद के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया था.

भंडार

भारत के एटॉमिक मिनरल डिवीज़न ने 1984 में मेघालय के पश्चिमी खासी हिल्स, डोमियोसिएट और वाख्यान में यूरेनियम आक्साइड के भंडारों का पता लगाया था. इसने 1992 में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की थी.

लेकिन खनन का काम फिर भी नहीं शुरू हो पाया. विशेषज्ञों का कहना है कि डामियोसिएट में 9500 टन और वाख्यान में लगभग 4000 टन यूरेनियम है. जो देश भर में पाए जाने वाले यूरेनियम का 16 फीसदी है.

इसके अलावा मेघालय के यूरेनियम की गुणवत्ता झारखंड की जादूगुड़ा की खानों में पाए जाने वाले यूरेनियम से कहीं बेहतर है.

कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी ने कहा कि मेघालय के अलावा पड़ोसी राज्य अरूणाचल प्रदेश में भी यूरेनियम भंडारों का पता चला है. लेकिन संशय की स्थिति के कारण एटॉमिक मिनरल डिवीज़न अब आगे खुदाई नहीं कर रहा है.

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