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मंगलवार, 12 जून, 2007 को 08:07 GMT तक के समाचार
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यूरेनियम की खुदाई के विरोध में हड़ताल

यूरेनियम
जादूगौड़ा स्थित यूरेनियम भंडारों के आसपास के क्षेत्र में रेडियोएक्टिवता का असर देखा गया है
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में यूरेनियम की खुदाई को लेकर मंगलवार को होने वाली ‘जन-सुनवाई’ के विरोध में की गई हड़ताल का जनजीवन पर असर पड़ा है.

मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स ज़िले के दोमियोसियात-वाख़्यान क्षेत्र में यूरेनियम का बड़ा भंडार है.

परमाणु खनिज प्रभाग (एएमडी) के अनुमान के मुताबिक यहाँ लगभग 13500 टन यूरेनियम है और यह भारत में यूरेनियम के ज्ञात भंडारों का लगभग 16 फ़ीसदी है.

ख़ास बात ये है कि यहाँ पाए गए यूरेनियम की रिकवरी दर झारखंड की जादूगोड़ा की खदानों से बेहतर है.

विरोध

लेकिन स्थानीय राजनीतिक और युवा संगठन हर साल 205 टन पीले केक यानी यू-308 यूरोनियम के उत्पादन की योजना का विरोध कर रहे हैं.

 इस परियोजना का विरोध करने से हमें कोई नहीं रोक सकता
जायर्वा, अध्यक्ष, खासी स्टूडेंट्स यूनियन

स्थानीय संगठनों और नेताओं का कहना है कि यूरेनियम की खुदाई से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा और क्षेत्र के पर्यावरण को भी नुक़सान पहुँचेगा.

अधिकारियों के अनुसार खासी स्टूडेंट यूनियन (केएसयू) ने इसके विरोध में सोमवार से 36 घंटे के बंद का आहवान किया है और इसके समर्थक बंद को प्रभावी बनाने के लिए हिंसा का सहारा भी ले रहे हैं.

पुलिस ने केएसयू के कुछ नेताओं और 20 से अधिक समर्थकों को गिरफ़्तार किया है. हड़ताल मंगलवार को भी जारी है.

केएसयू के अध्यक्ष सैमुएल जायर्वा ने कहा, “इस परियोजना का विरोध करने से हमें कोई नहीं रोक सकता.”

जनसुनवाई

सरकार इस मसले पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम तैयार किया है.

अधिकारियों ने यूरेनियम भंडार क्षेत्र के केंद्र में स्थित नोंगबाह जिनरिन गाँव में होने वाली इस जनसुनवाई में 15 हज़ार ग्रामीणों के शिरकत करने की संभावना जताई जा रही है.

जनसुनवाई में यूरेनियम खुदाई परियोजना पर लोगों की राय और इससे होने वाले कथित ख़तरों पर संदेहों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा.

 पंद्रह हज़ार लोगों की राय लेने का मतलब परियोजना को स्वीकृति देना है. यह लोकतांत्रिक तरीक़ा है और यह होना ही चाहिए. लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि लोग जन-सुनवाई का विरोध क्यों कर रहे हैं
डीडी लपांग, मुख्यमंत्री

मेघालय के मुख्यमंत्री डीडी लपांग यूरेनियम विरोधियों पर जमकर बरसे.

उन्होंने कहा, “पंद्रह हज़ार लोगों की राय लेने का मतलब परियोजना को स्वीकृति देना है. यह लोकतांत्रिक तरीक़ा है और यह होना ही चाहिए. लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि लोग जन-सुनवाई का विरोध क्यों कर रहे हैं.”

लपांग ने कहा कि उनकी सरकार ने जनसुनवाई में भाग लेने वाले परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है.

लेकिन केएसयू और अन्य क्षेत्रीय गुटों का आरोप है कि सरकार जन-सुनवाई में लोगों को चालाकी से बहला-फुसलाकर यूरेनियम की खुदाई शुरू कर सकती है.

केएसयू के अध्यक्ष जायर्वा कहते हैं, “विवादास्पद परियोजनाओं पर अधिकांश जन-सुनवाइयों में सरकार चालाकी करती है और यहाँ भी कुछ हटकर नहीं होगा.”

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