BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 24 अगस्त, 2007 को 18:13 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मुशर्रफ़ 'राजनीतिक मेल-मिलाप' के पक्ष में

परवेज़ मुशर्रफ़
परवेज़ मुशर्रफ़ इस फ़ैसले से पहले नवाज़ शरीफ़ की वापसी का विरोध कर रहे थे
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में राजनीतिक मेल-मिलाप और बातचीत की बात कही है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के उस अहम फ़ैसले की रात आया है जिसमें कोर्ट ने निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को वापस पाकिस्तान लौटने की अनुमति दे दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले ने पाकिस्तान में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ विपक्षी राजनीतिक दलों को 2007 के अंत में होने वाले चुनावों के लिए एकजुट कर दिया है.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में नवाज़ शरीफ़ की सरकार का तख़्ता पलट करते हुए जनरल मुशर्रफ़ ने ख़ुद सत्ता संभाल ली थी और वर्ष 2000 में नवाज़ शरीफ़ को परिवार सहित निर्वसन के लिए मजबूर कर दिया था.

पाकिस्तान के सरकारी टेलीविज़न पर एक कार्यक्रम में जनरल मुशर्रफ़ ने कहा, "राजनीतिक मेल-मिलाप और राष्ट्रीय सर्वसम्मति इस समय की ज़रुरत है."

 राजनीतिक मेल-मिलाप और राष्ट्रीय सर्वसम्मति इस समय की ज़रुरत है
जनरल परवेज़ मुशर्रफ़

वे देर रात को 'फ़्रॉम द प्रेसिडेंसी' कार्यक्रम में कुछ चुनिंदा लोगों के साथ चर्चा कर रहे थे.

इस कार्यक्रम को राष्ट्रपति के पक्ष में माहौल बनाने के लिए चलाए गए कार्यक्रम की तरह देखा जाता है.

गुरुवार को देर रात को प्रसारित हुए इस कार्यक्रम का विषय था कि आने वाले चुनावों में पाकिस्तान के सामने क्या चुनौतियाँ हैं.

चुनौती

जनरल मुशर्रफ़ की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के कुछ घंटों बाद आई है.

यह फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के उस पीठ ने दिया है जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी कर रहे थे.

इफ़्तिख़ार चौधरी वही मुख्य न्यायाधीश हैं जिन्हें राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने अनियमितता के आरोप लगाकर निलंबित कर दिया था और इस निर्णय को देश में न्यायापालिका पर लगाम कसने की कोशिश के रुप में देखा गया था.

नवाज़ शरीफ़ के समर्थक
नवाज़ शरीफ़ की वापसी के फ़ैसले से विपक्षी दलों में उत्साह है

हालांकि जनरल मुशर्रफ़ को यह फ़ैसला भारी पड़ा था और वकीलों के देशव्यापी प्रदर्शन के बीच न्यायाधीश चौधरी ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की और फ़ैसला उनके पक्ष में रहा.

कई महीनों के विरोध प्रदर्शन के बीच घरेलू राजनीति में जनरल मुशर्रफ़ इतने कमज़ोर पड़ गए हैं कि पिछले दिनों यह अटकलें भी लगाई जाने लगीं थीं कि वे देश में इमरजेंसी लागू कर सकते हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को इस समय सबसे बड़ी चुनौती नवाज़ शरीफ़ की देश में वापसी नज़र आ रही है.

हालांकि चर्चा के दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपनी सरकार का पक्ष रखने की कोशिश की.

उनका कहना था, "नवाज़ शरीफ़ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी. वे ख़ुद मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि वे 10 साल के लिए पाकिस्तान छोड़कर जाने को तैयार हैं."

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे असहमत होते हुए जनरल मुशर्रफ़ के कट्टर विरोधी नवाज़ शरीफ़ को देश में लौटने की अनुमति दे दी है.

हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ कुछ हफ़्ते पहले तक नवाज़ शरीफ़ को वापस न लौटने देने की बात कर रहे थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद उनका सुर बदला हुआ था, "ज़रूरत है कि हम पिछली बातों को भुला दें और आगे का रुख़ करें."

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक दलों के लोग देशहित को प्राथमिकता देंगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
'फ़ैसला मुशर्रफ़ के पतन की शुरुआत'
23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
'नवाज़ शरीफ़ स्वदेश लौटने को आज़ाद'
23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
बढ़ रही है मुशर्रफ़ की मुसीबत
23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
'पाक के सभी दलों से बात की जा रही है'
16 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>