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शनिवार, 25 अगस्त, 2007 को 10:03 GMT तक के समाचार
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'कामसूत्र' के देश में यौन शिक्षा पर विवाद कैसा?

खजुराहो के मंदिर
बहुत लोगों का मानना है कि पहले भारतीय संस्कृति में यौन मुद्दों पर खुलकर बात होती थी
भारत के कई राज्य सरकारों के स्कूली पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा लागू करने से इनकार के बाद 'कामसूत्र' के इस देश में यौन शिक्षा पर नई बहस छिड़ गई है. कई सामाजिक संगठनों ने इस शिक्षा के विरोध को ख़ारिज करते हुए इसके पक्ष में तर्क दिए हैं.

सामाजिक संगठन 'साक्षी' की निदेशक नैना कपूर कहती हैं, "कौन कहता है कि सेक्स पर चर्चा करना भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है? मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर बहुत बहस किए जाने की ज़रूरत है."

उनका कहना है, "सेक्स को अपनी संस्कृति के ख़िलाफ़ बताकर हम इसे नकारते रहे हैं."

मुश्किलें

दिल्ली स्थित सामाजिक संगठन 'साक्षी' भारत में यौन संबंधी मसलों पर जागरूकता के लिए काम करता है और कहने की ज़रूरत नहीं है कि उसका काम आसान नहीं है.

संगठन में कार्यक्रम समन्वयक का काम करने वाली स्मिता भरतिया का कहना है, "शुरुआत में विद्यार्थी, अध्यापक और माता-पिता में से कोई भी इस विषय पर बात करने में सहज नहीं होता."

वो आगे कहती हैं, "लेकिन हम भी अचानक ही विषय-प्रवेश कर बातचीत करना शुरू नहीं कर देते. हम संगोष्ठी और कार्यशाला आयोजित करते हैं और लोगों से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश करते हैं."

भारत सेक्स की प्राचीनतम किताबों में से एक 'कामसूत्र' और खजुराहो की कामोत्तजेक मूर्तियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है.

स्वास्थ्य मंत्री अंबूमणि रामदॉस
स्वास्थ्य मंत्री सेक्स शिक्षा के समर्थन में हैं

इसलिए बहुत से लोग पूछते हैं कि आधुनिक भारत में सेक्स पर बहस क्यों नहीं हो सकती.

कार्यक्रम

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) की महानिदेशक सुजाता राव का कहना है, "हमने स्कूलों में सेक्स शिक्षा दिए जाने की ज़रूरत का आकलन किया है. इसमें बात सिर्फ़ इतनी है कि जब कुछ लोग संस्कृति का मुद्दा उठा रहे हैं तो इसे कैसे लागू किया जाता है."

केंद्र सरकार के किशोर शिक्षा कार्यक्रम (एईपी) के तहत 14 से 18 साल की उम्र वाले विद्यार्थियों को सेक्स शिक्षा देने का निर्णय लिया गया है.

अध्यापकों के लिए सेक्स शिक्षा पैकेज़ यूनिसेफ़ की मदद से शिक्षा मंत्रालय और नैको ने तैयार किया है.

सरकार की तरफ से एईपी के समन्वयक जेएल पांडे का कहना है, "यह कार्यक्रम नया है इसलिए इसका विरोध हो रहा है. सेक्स शिक्षा से जुड़ा ऐसा कोई भी फ़ॉर्मूला नहीं हो सकता जो सभी को स्वीकार हो."

समर्थन

वैसे बहुत से माता-पिता और विद्यार्थी सरकार की इन कोशिशों का समर्थन करते हैं.

 मेरी शादी के समय भी कई ऐसी चीज़ें थीं जो मैं ठीक से नहीं जानती थी. मैं चाहूँगी कि मेरी बेटी को इन बातों की जानकारी हो
अनुजा शंकर, अभिभावक

दिल्ली में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मान्या ने बीबीसी से कहा, "अगर मुझे मेरे अध्यापक ही ऐसी चीज़ें पढ़ाएँगे तब भी मैं सहज महसूस करूँगी. वो हमारे दोस्त की तरह हैं."

मान्या ने बताया कि उसकी जीवविज्ञान की अध्यापिका ने उसे विषय से जुड़ी सामान्य जानकारी तभी देने में मदद की थी जब वह 12 साल की थी.

मध्य प्रदेश की रहने वाली रेखा सेनगुप्ता भी मान्या की बात का समर्थन करते हुए कहती हैं, "अगर मेरे बच्चों को स्कूल में इस तरह की शिक्षा मिलेगी तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी."

एक दूसरी अभिभावक अनुजा शंकर का कहना है, "मेरी शादी के समय भी कई ऐसी चीज़ें थीं जो मैं ठीक से नहीं जानती थी. मैं चाहूँगी कि मेरी बेटी को इन बातों की जानकारी हो."

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस ने उन राज्यों को चेतावनी दी है जो इस क़दम का विरोध कर रहे हैं.

उनका कहना है, "अगर सही समय पर जागरुकता नहीं फैलाई गई तो इन राज्यों को बहुत नुक़सान होगा."

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