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गुरुवार, 25 जनवरी, 2007 को 03:45 GMT तक के समाचार
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स्कूलों में सूर्य नमस्कार करवाने पर विवाद

फ़ाइल फ़ोटो
राज्य सरकार इससे पहले वंदेमातरम गाने का आदेश देकर विवादों में घिरी थी
मध्यप्रदेश सरकार गुरुवार से राज्य के सभी स्कूलों में सूर्य नमस्कार जैसे योग करवाना शुरू कर रही है.

हालांकि बुधवार को ही जबलपुर हाईकोर्ट की ओर से जारी एक अंतरिम आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार किसी भी विद्यार्थी को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है.

साथ ही राज्य सरकार से इस संदर्भ में चार सप्ताह की समयावधि के भीतर जवाब पेश देने के लिए भी कहा गया है.

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार ने अपने एक आदेश में राज्य के सभी स्कूलों को आदेश दिया है कि 25 जनवरी से विद्यार्थियों को सूर्यनमस्कार करवाया जाए.

राज्य सरकार के इस फैसले का कई मुस्लिम और ईसाई संगठनों की ओर से विरोध किया जा रहा है और उन्हीं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इसे अनिवार्य न बनाने का अंतरिम आदेश जारी किया है.

इससे पहले राज्य सरकार वंदेमातरम गाने को अनिवार्य बनाने के मसले पर विवादों में घिर गई थी.

विवादित आदेश

राज्य सरकार के इस फैसले के मुताबिक स्कूलों में वंदेमातरम गाया जाएगा और फिर सूर्य नमस्कार करवाया जाएगा. दलील यह है कि योग से विद्यार्थियों को कई तरह के लाभ होंगे.

 राज्य सरकार अदालत के इस आदेश का आदर करती है. हमने इसे अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया है
नरोत्तम मिश्र, शिक्षा मंत्री

और तो और, राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ख़ुद इसका शुभारंभ कर रहे हैं.

हालांकि राज्य के शिक्षा मंत्री नरोत्तम मिश्र ने बीबीसी को बताया, "राज्य सरकार अदालत के इस आदेश का आदर करती है. हमने इसे अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया है."

यह बात और है कि इस कार्यक्रम की शुरुआत से पहले शिक्षकों के लिए जिलाधिकारियों की ओर से जो पत्र जारी किया गया था उसमें कहा गया था कि कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

माना जा रहा है कि राज्य सरकार का यह नया आदेश मुख्यमंत्री को उनके योगगुरू बाबा रामदेव ने सुझाया है. इस कार्यक्रम की शुरुआत में वो भी शामिल होने वाले थे पर अपने बैंकाक प्रवास पर होने के कारण वो शामिल नहीं हो पा रहे हैं.

विरोध

राज्य सरकार के इस नए आदेश का राज्य के कई मुस्लिम और ईसाई संगठनों की ओर से विरोध हो रहा है.

 इस तरह के कार्यक्रम में जब एक समुदाय के बच्चे योग करेंगे और दूसरे समुदाय के बच्चे नहीं करेंगे तो इससे बच्चों के बीच शुरुआत से ही एक खाई विकसित हो जाएगी. संघ और उसकी विचारधारा वाले संगठनों की ऐसी ही मंशा भी है
लज्जा शंकर हरदेनिया, वरिष्ठ पत्रकार

अल्पसंख्यक समूहों का कहना है कि उन्हें योग से ऐतराज नहीं है पर चिंता उसके साथ करवाए जा रहे मंत्रपाठ से है.

हालांकि सरकार की ओर से दी गई दलील में कहा गया है कि मंत्र तो योग का आवश्यक हिस्सा हैं.

वरिष्ठ पत्रकार और बुद्धिजीवी लज्जा शंकर हरदेनिया राज्य सरकार के इस फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सरकार ने प्रशिक्षण के लिए लिखे गए पत्र में जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया है उससे साफ है कि वो कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को कितनी गंभीरता से लेगी.

हरदेनिया इसे राज्य सरकार के सोचे समझे एजेंडे का हिस्सा मानते हैं.

वो कहते हैं, "इस तरह के कार्यक्रम में जब एक समुदाय के बच्चे योग करेंगे और दूसरे समुदाय के बच्चे नहीं करेंगे तो इससे बच्चों के बीच शुरुआत से ही एक खाई विकसित हो जाएगी. संघ और उसकी विचारधारा वाले संगठनों की ऐसी ही मंशा भी है."

एक ओर जहाँ राज्य सरकार इस कार्यक्रम को गुरुवार से शुरू कर रही है वहीं राजधानी भोपाल में कई अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और कुछ समाजसेवी संगठन के इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

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