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वाम दलों का रुख़ हुआ नरम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत अमरीका परमाणु संधि पर कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच चल रहे तनाव के कम होने के आसार है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कारत ने कहा कि वाम दल नहीं चाहते कि परमाणु संधि पर जारी विवाद का असर सरकार पर पड़े. उनका कहना था कि अब यह सरकार पर है कि वो इस संकट का निपटारा कैसे करती है. हालाँकि उन्होंने फिर एक बार वाम दलों की आपत्ति जता दी. पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक के बाद कारत ने कहा कि केंद्रीय समिति ने इस संधि और सरकार के साथ संबंधों पर उचित निर्णय लेने का अधिकार पोलित ब्यूरो को दिया है. रवैया हालांकि करात का रवैया उतना कड़ा नहीं दिखा और साफ़ लग रहा था कि वामपंथी दल फ़िलहाल सरकार गिराने के पक्ष में नहीं है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर सरकार इस संधि को लेकर आगे कोई भी क़दम उठाती है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. यह पूछे जाने पर कि सरकार की ओर से वाम दलों की चिंताओं पर चर्चा के लिए प्रस्तावित व्यवस्था के बारे में उनका क्या कहना है तो करात ने कहा कि ऐसी किसी भी व्यवस्था का वो स्वागत करते है जो इस संधि की आगे की प्रक्रिया को रोकती हो. विशेषज्ञों का कहना है कि वाम दल फ़िलहाल सरकार गिराने के पक्ष में नहीं है लेकिन वो ये भी नहीं चाहते कि परमाणु संधि पर उनका विरोध कम हो. कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दक्षिण अफ्रीका की अपनी यात्रा को बीच में ही छोड़कर गुरुवार की रात वापस आ रही हैं. उम्मीद है कि उनके लौटने के बाद दोनों दलों के बीच कोई बातचीत हो जिससे इस पूरे विवाद के निपटारे का कोई रास्ता निकल सके. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु समझौते का नफ़ा-नुकसान18 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'टला नहीं है यूपीए सरकार का संकट'20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु एजेंसी से बातचीत न करे सरकार'20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर गतिरोध कायम20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर आगे बढ़ेगा भारत'22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस राजदूत को लेकर संसद में फिर हंगामा22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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