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'तालेबान को समाप्त करने पर सहमति' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने तालेबान को समाप्त करने पर वचनबद्धता ज़ाहिर की है. दोनों नेताओं के बीच अमरीकी राष्ट्रपति के आरामगाह कैंप डेविड में दो दिन तक बातचीत चली. इसके बाद दोनों नेताओं ने एक साझा पत्रकारवार्ता को संबोधित किया. दोनों नेताओं का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी प्रगति हुई है. राष्ट्रपति करज़ई ने तालेबान के ख़तरे को बहुत कम कर आँका. उनका कहना था,'' तालेबान हारी हुई शक्ति हैं और इनसे मेरी सरकार को कोई ख़तरा नहीं है.'' लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सहयोगी देशों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि चरमपंथियों को पहाड़ों से उनके छुपने के स्थानों से निकालें क्योंकि वो आम नागरिकों के लिए गंभीर ख़तरा हैं. राष्ट्रपति करज़ई ने अमरीकी और नैटो अभियान के दौरान आम नागरिकों के मारे जाने का मामला उठाया. राष्ट्रपति बुश ने इसकी ज़िम्मेदारी तालेबान पर डाल दी. उनका कहना था कि वो अफ़ग़ान लोगों की पीड़ा समझते हैं लेकिन इसके लिए तालेबान ज़िम्मेदार हैं क्योंकि वे आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं. राष्ट्रपति बुश का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में 50 लाख बच्चे अब स्कूल जाने लगे हैं, इनमें से एक तिहाई लड़कियाँ हैं. हामिद करज़ई ने कहा कि तालेबान के सत्ता से बेदखल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है जिसकी वजह से पाँच साल से कम उम्र के 85 हज़ार बच्चे जीवित हैं. राष्ट्रपति करज़ई की अमरीका यात्रा ऐसे समय हुई है जब अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से चरमपंथियों से ख़तरा बढ़ा है. कोरियाई बंधक करज़ई ने स्पष्ट किया कि अफ़ग़ानिस्तान में बंधक बनाए गए 21 दक्षिण कोरियाई नागरिकों की रिहाई के लिए तालेबान से कोई सौदेबाजी नहीं की जाएगी. तालेबान ने दो दक्षिण कोरियाई लोगों की हत्या कर दी थी. उनकी माँग है कि इन बंधकों के बदले उनके नेताओं को रिहा किए जाए. इसके पहले तालेबान के एक नेता ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि 'बंधकों का भविष्य इन नेताओं के हाथ में है.' अमरीका ने भी इस सामूहिक अपहरण की कड़ी निंदा की है, उसके एक प्रवक्ता ने कहा कि "तालेबान अपने आतंकवादी तौर-तरीक़ों से बाज़ नहीं आ रहा है." ईरान के मामले पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद नज़र आए. बुश ने इन्हें स्पष्ट भी कर दिया. उनका कहना था कि वो राष्ट्रपति करज़ई के उस बयान से सहमत नहीं हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अफ़गानिस्तान के मामले में बाधा नहीं डाल रहा है बल्कि सहायता कर रहा है. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि ईरान भला देश नहीं है और अमरीका उसे अलग थलग करने की कोशिशें जारी रखेगा. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अमरीका अफ़ग़ानिस्तान को 10 अरब डॉलर की सहायता दे रहा है जिसका उद्देश्य देश के सुरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाना है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आम नागरिकों की मौत की जाँच हो'22 जून, 2007 | भारत और पड़ोस नैटो हमले में 'आम नागरिकों' की मौत22 जून, 2007 | भारत और पड़ोस काबुल को निशाना बनाने की रणनीति21 जून, 2007 | भारत और पड़ोस 'तालेबान दीर्घकालिक खतरा नहीं'21 जून, 2007 | भारत और पड़ोस भारत का बहुत कुछ है दाँव पर21 जून, 2007 | भारत और पड़ोस असुरक्षा के साए में अफ़ग़ानिस्तान19 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान संघर्ष में सौ की मौत19 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में जीती जा सकेगी जंग?18 जून, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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