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जर्मन बंधकों की स्थिति पर विरोधाभास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने तालेबान के उस दावे को गलत बताया है जिसमें दो जर्मन बंधकों की हत्या की बात कही गई है. सरकार के मुताबिक एक बंधक जीवित है. सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि दो बंधकों में एक की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई और दूसरा जीवित है. इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के प्रवक्ता ने दावा किया है कि राजधानी काबुल के पास इस सप्ताह अगवा किए गए जर्मनी के दो नागरिकों की हत्या कर दी गई है. तालेबान के प्रवक्ता क़ारी यूसुफ़ अहमदी ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में तैनात उसके तीन हज़ार जर्मन सैनिकों को वापस बुलाने की माँग की गई थी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया. इस बीच अफ़ग़ानिस्तान और जर्मनी के अधिकारियों ने जर्मनी के दोनों नागरिकों के मारे जाने की फ़िलहाल पुष्टि नहीं की है और कहा कि अभी इसके प्रमाण मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं. तालेबान ने गुरुवार को अगवा किए दक्षिण कोरिया के कम-से-कम 18 नागरिकों को भी जान से मारने की धमकी दी है. स्थानीय पुलिस ने बताया कि वरदाक प्रांत में एक बांध परियोजना के लिए काम कर रहे दो जर्मनों को बुधवार को उनके छह सहयोगियों के साथ बंधक बना लिया गया था. जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्टिन जेगर ने कहा कि तालेबान के बयान को काफ़ी गंभीरता से लिया जा रहा है लेकिन इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए कोई तरीक़ा नहीं है. दक्षिण कोरियाई बंधक क़ारी यूसुफ़ ने बताया कि पहले बंधक की हत्या के बाद अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने संपर्क साधा गया था और दूसरे बंधक की हत्या के लिए मोहलत बढ़ा दी गई थी. प्रवक्ता के अनुसार उसके कुछ ही समय बाद दूसरे बंधक की भी हत्या कर दी गई. इससे पहले पिछले साल अप्रैल में एक भारतीय इंजीनियर की हत्या कर दी गई थी. तालेबान के प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिण कोरियाई बंधकों के भाग्य के बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं किया गया है. तालेबान चाहता है कि 200 दक्षिण कोरियाई सैनिक अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दें. जबकि दक्षिण कोरिया पहले से ही इस साल के अंत तक अपने सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रहा है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति रूह मू-ह्यान ने शनिवार को टेलीविज़न पर अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है. दक्षिण कोरिया के नागरिकों को ग़ज़नी प्रांत में उस समय बंधक बनाया गया था जब वे गुरुवार को बस से कंधार से काबुल जा रहे थे. बताया जा रहा है कि इनमें से 15 महिलाएँ हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें वज़ीरिस्तान में हमला, 32 की मौत23 जून, 2007 | भारत और पड़ोस काबुल को निशाना बनाने की रणनीति21 जून, 2007 | भारत और पड़ोस दादुल्ला के शव के बदले बंधकों की रिहाई05 जून, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान ने फ़्रांसीसी राहतकर्मी को छोड़ा28 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस फ़्रांसीसी बंधकों का वीडियो जारी14 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़गानिस्तान में इटली की बंधक रिहा09 जून, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी कर्मचारी को रिहा किया गया24 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस 'मेरे सामने बंधकों की गर्दनें काटी गईं'09 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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