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'मेरे सामने बंधकों की गर्दनें काटी गईं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी चरमपंथियों की क़ैद में रहे एक पाकिस्तानी नागरिक ने स्वदेश लौटने के बाद बताया है कि तीन बंधकों की उसके सामने ही गला काटकर हत्या कर दी गई. इराक़ में एक अमरीकी कंपनी के लिए ड्राइवर का काम कर रहे अमजद हफ़ीज़ को इराक़ी चरमपंथियों ने 25 जून को बंधक बना लिया था लेकिन दो जुलाई को उनको रिहा भी कर दिया गया. अमजद ने बताया कि तीन बंधकों की उनके सामने ही निर्दयता से हत्या कर दी गई. उनमें से दो अंग्रेज़ी भाषी और एक इराक़ी था. इराक़ में पिछले कुछ महीनों के दौरान अपहरण की घटनाएं बढ़ गई हैं. लेकिन एक अमरीकी निक बर्ग और एक दक्षिण कोरियाई किम सुइ इल की हत्या की ही जानकारी मिल पाई है. 26 वर्षीय अमजद हफ़ीज़ शुक्रवार को जब इस्लामाबाद पहुँचे तो माहौल भावुक हो उठा. परिवार के सदस्यों से मिलकर वे फूट-फूट कर रो पड़े. ख़ुशी से रो रहीं उनकी माँ सईदा जान ने कहा, "मैं शब्दों में यह बयां नहीं कर सकती कि अपने बेटे को देखकर मैं कितनी ख़ुश हूँ." आपबीती अमजद ने बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत में बताया कि नसीरिया में उन्हें बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया गया था. उन्हें एक सूई दी गई जिसके बाद वे बेहोश हो गए. उन्होंने बताया कि अपहर्ताओं ने उन्हें सीआईए का एजेंट कहा और तीन दिन तक बेरहमी से पीटते रहे. अमजद से चरमपंथियों ने यहाँ तक कह दिया था कि किसी भी क्षण उनकी हत्या की जा सकती है. उन्हें आख़िरी बाद ख़ुदा को याद करने को कहा गया. उसके बाद अमजद को एक कमरे में ले जाया गया जहाँ उनके सामने ही तीन बंधकों की गला काटकर हत्या कर दी गई. अमजद ने बताया, "जिन बंधकों की गला काटकर हत्या की गई. उनके हाथ-पैर पहले ही बाँध दिए गए थे. उसके बाद एक मोटा व्यक्ति आया और उसने अल्लाहो अकबर कहते हुए तीनों की गर्दनें काट दीं." अमजद ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें क्यों छोड़ दिया गया. आभार उन्होंने पाकिस्तानी टीवी चैनलों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उनकी माँ की अपील को बार-बार दिखाया.
अमजद ने बताया कि वे राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मिलकर उन्हें भी धन्यवाद देना चाहते हैं. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने अमजद हफ़ीज़ की रिहाई का स्वागत करते हुए इस तरह की घटनाओं को इस्लाम के ख़िलाफ़ बताया है. अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले अमजद ने बताया कि अभी वे छह महीने की छुट्टी पर हैं और शायद कुवैत लौट जाएँ जहाँ वे नौकरी करते हैं. हफ़ीज़ ने कहा कि वे फिर इराक़ कभी नहीं जाएँगे. उन्होंने पाकिस्तानी लोगों को इराक़ न जाने की सलाह भी दी. हफ़ीज़ की माँ ने कहा कि वे इस बात से नहीं डरतीं कि उनका बेटा दोबारा नौकरी करने जाएगा. उन्होंने कहा कि ज़िंदगी और मौत तो ख़ुदा के हाथ में है. |
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