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मुंबई: एक और को मौत की सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के लिए शुक्रवार को एक और व्यक्ति को फाँसी की सज़ा सुनाई है. अदालत इससे पहले छह लोगों को फाँसी की सज़ा सुना चुकी है. इसके अलावा अदालत ने पूर्व कस्टम कलेक्टर सोमनाथ थापा को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है और एक अन्य अभियुक्त को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. इसके साथ ही इस मामले में 87 दोषियों को सज़ा सुनाई जा चुकी है. शुक्रवार को मोहम्मद इक़बाल शेख को फाँसी की सज़ा सुनाई गई है. मोहम्मद इक़बाल को माहिम में मछुआरों की बस्ती में बम फेंकने का दोषी पाया गया. इसके अलावा उन्होंने दो और जगह बम रखे, जिनमें विस्फोट नहीं हुआ. पूर्व कस्टम कलेक्टर सोमनाथ थापा को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा है कि उन्होंने जिस तरह से अभियुक्तों की मदद की है उसकी जितनी निंदा की जाए कम है. सरकारी वकील उज्जवल निकम के अनुसार अदालत ने बशीर उस्मान शेख़ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है. अभियोजन पक्ष ने उन पर बम फेंकने का आरोप लगाया था लेकिन बचाव पक्ष का कहना था कि वे बम फेंकना चाहते थे लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके थे. सरकारी वकील निकम ने कहा है कि उनकी राय में यह सज़ा कम है और इसे लेकर आगे अपील की जाएगी. अब तक टाडा अदालत ने कुल सात लोगों को फाँसी सज़ा की सुनाई है, 16 लोगों को उम्रक़ैद दी गई है. इससे पहले गुरुवार को अदालत ने असगर मुक़दम, शहनवाज़ कुरैशी और शोएब घनसार को मौत की सज़ा सुनाई थी. असगर मुकादम और शहनवाज़ कुरैशी को प्लाजा सिनेमा पर विस्फोटक रखने का दोषी पाया गया था. शोएब घनसार को झावेरी बाज़ार में बम रखने का दोषा पाया गया था. बुधवार को टाडा अदालत ने तीन लोगों परवेज़ शेख, मुश्ताक तरानी और अब्दुल गनी तुर्क को मौत की सज़ा सुनाई थी. सरकारी वकील उज्जवल निकम के अनुसार मौत के फ़ैसलों की पुष्टि के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति ली जाएगी और उसके बाद सज़ा पर अमल किया जा सकता है. 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में आतंकवाद निरोधक अदालत ने कुल 100 लोगों को दोषी ठहराया था और 23 लोगों को बरी कर दिया था. अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं और उन्हें अभी सज़ा सुनाई जानी बाक़ी है और उन्हें शनिवार को अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है. बम धमाके 1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.
माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे. माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अब भी फ़रार हैं. भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है. मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 वर्षों से जेल में हैं. यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती. |
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