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मधेशी वार्ता में शामिल हों: नेपाल सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने दक्षिण तराई के मधेशी विद्रोहियों को चेतावनी दी है कि वो दो सप्ताह के भीतर शांति वार्ता में शामिल हो जाएं अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें. नेपाल के गृह मंत्री कृष्ण प्रसाद सितौला ने कहा कि सरकार के पास चुनाव की तैयारी और नए संविधान पर निर्णय करने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है. हालांकि अभी तक मधेशी विद्रोहियों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है. मधेशी समुदाय अपने लिए संसद में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग करता रहा है. तराई के इलाक़े में रहने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके पुरखे किसी ज़माने में भारत से नेपाल में बसने आए थे. इन लोगों को लंबे समय से शिकायत रही हैं कि नेपाल सरकार ने उनकी अनदेखी की है और उनकी समस्याओं और विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है. उनका आरोप है कि उन्हें नेपाल की राष्ट्रीयता देने से भी इनकार किया गया है जब कि वे लोग वहाँ दशकों से रह रहे हैं. कुछ समय पहले नेपाल के तराई इलाक़े में हिंसा हुई थी जिससे सरकार और माओवादियों के बीच हुए शांति समझौते पर संकट उत्पन्न हो गया था. इसके बाद सरकार ने कुछ घोषणाएँ की थी जिसमें तराई के इलाक़ों में आबादी के घनत्व के आधार पर संसदीय क्षेत्रों के पुनर्निधारण और संघीय क़ानून की शुरुआत करने जैसी बातें शामिल थीं. हालांकि माओवादी मधेशियों का यह कहकर विरोध करते रहे हैं कि वे स्वयं क्षेत्रीय और जातीय अधिकारों के सबसे बड़े हिमायती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में झड़पों के बाद कर्फ़्यू जारी22 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस दक्षिणी नेपाल में जातीय हिंसा, तनाव20 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में हिंसा जारी, मंत्री का इस्तीफ़ा29 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस दक्षिणी नेपाल में हिंसा बढ़ी25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस प्रचंड ने चुनाव में 'बाधा' की आशंका जताई13 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में दूसरे दिन मधेशियों का बंद 07 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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