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लाल मस्जिद परिसर में मिलीं 73 लाशें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि सुरक्षाबलों और कट्टरपंथियों के बीच हुई भीषण गोलीबारी के बाद उन्हें लाल मस्जिद के भीतर से 73 लोगों की लाशें मिली हैं. कोई 36 घंटों तक चली इस गोलीबारी में सेना के नौ जवान मारे गए थे और तीस से अधिक घायल हुए थे. मारे गए लोगों में कट्टरपंथी नेता अब्दुल राशिद ग़ाज़ी भी शामिल थे. अधिकारियों का कहना है कि लाल मस्जिद परिसर में अब कोई कट्टरपंथी नहीं है लेकिन सेना अभी भी विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की तलाश कर रही है ताकि उसे हटाया जा सके. पहले माना जा रहा था कि मरने वालों में महिलाएँ और बच्चे हो सकते हैं लेकिन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद का कहना है कि जो शव मिले हैं, उनमें से एक भी किसी महिला या बच्चे का नहीं है. उन्होंने कहा कि मस्जिद को पूरी तरह से सुरक्षित बनाए जाने के बाद पत्रकारों को अंदर जाने दिया जाएगा. दूसरी ओर अलक़ायदा के दूसरे बड़े नेता एमन अल-ज़वाहरी ने इंटरनेट पर दिए गए एक संदेश में मस्जिद पर की गई सैन्य कार्रवाई को 'अपराध' कहा है. हालांकि इस संदेश की वैधता पुष्ट नहीं हो सकी है. स्पष्ट नहीं लाल मस्जिद से कट्टरपंथियों को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को तड़के कार्रवाई शुरु की थी. इससे पहले मस्जिद परिसर से 13 सौ लोग बाहर निकलने में सफल हुए थे लेकिन सेना के एक कमांडर सहित 21 लोग मारे गए थे. अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि जब सेना ने कार्रवाई शुरु की तो मस्जिद परिसर में कितने लोग थे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी भी मस्जिद परिसर में कोई नहीं गया है और यह कोई नहीं बता पा रहा है कि वास्तव में कार्रवाई के दौरान मस्जिद में हुआ क्या था. इस्लामाबाद में लाल मस्जिद को लेकर तनाव तब पैदा होना शुरु हुआ जब कुछ पुलिसकर्मियों और ऐसे लोगों का अपहरण किया गया जिन्हें कट्टरपंथी ऐसी गतिविधियों से जुड़े मानते थे जिन्हें वे इस्लाम विरोधी कहते हैं. सेना और कट्टरपंथियों के बीच लगभग एक हफ़्ते तक तनाव बना रहा और मस्जिद और उससे जुड़े मदरसे में रहने वाले छात्रों को वहाँ से बाहर निकालने के प्रयास चलते रहे. कार्रवाई से एक दिन पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मस्जिद के प्रबंधन और कट्टरपंथियों के चेतावनी दी थी कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते तो वे कार्रवाई में मारे जाएँगे. कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल ग़ाज़ी ने कार्रवाई से पहले सरकार की चेतावनी के बाद भी कड़ा रुख अपना रखा था. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जावेद इक़बाल चीमा का कहना था कि कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल ग़ाज़ी कई महिलाओं और बच्चों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे. |
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