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शुक्रवार, 06 जुलाई, 2007 को 09:35 GMT तक के समाचार
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'सैन्य अधिकारी मेघा की हत्या हुई थी'

भारतीय सैनिक
भारतीय सैनिकों को युद्धविराम के दौरान भी भारी तनाव झेलना पड़ता है
पिछले दिनों मृत पाई गई भारतीय सेना की महिला अधिकारी मेघा के पिता अरुण राजदान का कहना है कि मेघा ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उनका क़त्ल हुआ है.

अरुण राजदान ने कहा, "जो लड़की अपने मन से देश सेवा करने जाती है वो आत्महत्या कैसे कर सकती है. उसे सख़्त प्रशिक्षण दिया गया था."

मेघा के पिता अरुण राजदान ने बताया कि मेघा का पारिवारिक जीवन सुखद था और अभी कुछ दिनों पहले ही उनकी पत्नी वहाँ से लौटी थीं.

ग़ौरतलब है कि भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में सैन्य अधिकारी मेघा राजदान जम्मू की सैनिक छावनी स्थित अपने घर में मृत पाई गईं थीं.

 सैन्य छावनी में ये हादसा हुआ. हर बार सेना जांच बैठाती है लेकिन आज तक किसी भी सैनिक अधिकारी को सज़ा नहीं हुई है और इसीलिए घटनाएँ बढ़ती हैं
अरुण राजदान, मेघा के पिता

पुलिस के अनुसार कैप्टन मेघा ने अपने घर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या की थी और उन्होंने एक 'सुइसाइड नोट' भी छोड़ा था.

उनका कहना है,"सैन्य छावनी में ये हादसा हुआ. हर बार सेना जांच बैठाती है लेकिन आज तक किसी भी सैनिक अधिकारी को सज़ा नहीं हुई है और इसीलिए घटनाएँ बढ़ती हैं."

अरुण राजदान को सेना की तरफ से गठित जांच समिति पर भी विश्वास नहीं है.

मेघा के पिता ने बताया,"जिस दिन ये हादसा हुआ उस दिन एक बजे मैंने और मेरी पत्नी ने मेघा से फ़ोन पर बातचीत की थी. उसकी बातों से बिल्कुल नहीं लगा कि उसे कोई परेशानी है. अगले चार-पाँच घंटों में ऐसा क्या हो गया कि उसे आत्महत्या करनी पड़ी. मैं ये बातें जांच समिति को भी बता चुका हूँ."

अरुण राजदान ने सेना से अपील की कि मेघा के हत्या के पीछे जो भी लोग हों उन्हें सामने लाया जाए.

बढ़ती घटनाएँ

भारतीय सैनिक योगा करते हुए
तनाव कम करने के लिए सैनिकों को योगा सिखाया जाता है

पिछले वर्ष जून में एक अन्य महिला अधिकारी लेफ़्टिनेंट सुष्मिता चक्रवर्ती ने भारतीय सेना के उत्तरी कमान के मुख्यालय उधमपुर में ख़ुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी.

विश्लेषकों का कहना है कि लाखों की तादाद वाली भारतीय सेना के सैनिक बहुत तनाव में हैं.

हालाँकि पिछले कुछ दशकों में सेनाओं को पूर्ण युद्ध का सामना नहीं करना पड़ा है, लेकिन सीमा पर चौकसी के अलावा उन्हें देश में चरमपंथी गतिविधियों से निपटने के लिए तैनात किया जाता रहा है.

यहाँ तक कि दंगे पर नियंत्रण के लिए भी नागरिक प्रशासन अक्सर सेना की मदद लेता है.

अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों में बढ़ते तनाव का कारण उनका गिरता मनोबल, काम की जटिल परिस्थितियाँ, छुट्टियों की कमी और तनख़्वाह का कम होना है.

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