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सेना में आत्महत्या के मामलों की जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा है कि सुरक्षा बलों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित कर दी गई है. एंटनी ने वादा किया कि समिति इस सिलसिले में जो भी सिफ़ारिश करेगी उसे सरकार बिना देरी किए लागू करेगी. प्रणव मुख़र्जी की जगह रक्षा मंत्रालय संभालने के बाद एंटनी पहली बार भारत प्रशासित कश्मीर के दौरे पर हैं. उन्होंने कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर के अशांत और दुर्गम इलाक़ों में मुस्तैद जवानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता बढ़ाई जाएगी और सुविधाओं का स्तर भी बढ़ाया जाएगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना के तीनो अंगों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा. आत्महत्या कुछ दिनों पहले ही भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में कर्नल रैंक के सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी पंकज झा ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. ग़ौरतलब है कि पिछले महीने ही श्रीनगर में एक समारोह में बोलते हुए भारतीय सेना के प्रमुख जेजे सिंह ने कहा था कि हर साल औसतन 100 भारतीय सैनिक आत्महत्या कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि आत्महत्या के ऐसे मामले चरमपंथियों से प्रभावित क्षेत्रों में ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में राज्य में सेना के लोगों में आत्महत्या के मामलों में तेज़ी नज़र आई है. इससे पहले ऐसी चार घटनाओं में नौ सैनिकों ने या तो ख़ुद को जान से मार दिया या फिर अपने साथियों की हत्या कर दी. इन आत्महत्याओँ के लिए जो एक कारण बताए जा रहे हैं, उसके मुताबिक लंबे समय तक कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के कारण भी ऐसी घटनाएँ हो सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सैनिकों को छुट्टी न मिलना, व्यक्तिगत या घरेलू कारणों से भी इस तरह की घटनाएँ हो सकती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें कर्नल ने ख़ुद को गोली मारी01 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सबसे ऊँचे मोर्चे पर मुस्तैद सैनिक13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सियाचिन छोड़ना नहीं चाहती सेना11 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'साल में सौ सैनिक कर रहे हैं आत्महत्या'04 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस कुछ यूँ गुज़रता है सीमा पर सैनिकों का दिन04 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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