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सियाचिन छोड़ना नहीं चाहती सेना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सियाचिन में तैनात भारतीय सेना का मानना है कि दुनिया की इस सबसे ऊँची रणभूमि को छोड़ देना भारत के सामरिक और कूटनीतिक हित में नहीं होगा. सेना ने यह संकेत ऐसे समय पर दिए हैं जब भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव समग्र वार्ता की प्रक्रिया को फिर आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में मिलने वाले हैं. ग़ौरतलब है कि इस वर्ष जुलाई में मुंबई बम धमाकों के बाद से ही दोनों देशों के बीच वार्ता थम गई थी. सियाचिन में नवंबर 2003 से संघर्षविराम लागू है. बंदूकों की आवाज़ तो थम गई है पर यहाँ की दुर्गम पहाड़ी भूमि में मौसम अब भी सैनिकों के लिए दुश्मन बना हुआ है. हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद मुहम्मद क़सूरी ने कहा था कि सियाचिन से सेना हटाने पर दोनों देश समझौते के काफ़ी करीब पहुँच चुके हैं. उनका ये भी कहना था कि अगर ऐसा होता है तो भारतीय प्रधानमंत्री अपनी प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा में बहुत मज़बूत प्रस्ताव पेश कर सकेंगे. कठिन चुनौती पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद सेना ने इस पर अपना रुख़ रखने के लिए देश के कुछ पत्रकारों को सियाचिन के दौरे पर ले गई. सियाचिन में सेना बनाए रखना कोई आसाना काम नहीं है. यहाँ के कमांडिग अफ़सर ब्रिगेडियर ओमप्रकाश का कहना था कि सियाचिन से फ़ौज हटाने की बात पाकिस्तान इसलिए कर रहा है क्योंकि वो सियाचिन से काफ़ी दूर है. सामरिक और ऊँची चोटियाँ भारत के हाथ में है और सैन्य अधिकारी मानते हैं कि सियाचिन पर नियंत्रण भारत के लिए गौरव की बात है. इस ‘गौरव’ को बनाए रखने के लिए भारतीय सेना प्रतिदिन तीन करोड़ रुपए ख़र्च करती है. सर्दियों में यहाँ औसतन हर महीने तीन सैनिक और गर्मी में दो सैनिक अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. वर्ष 1984 में 'ऑपरेशन मेघदूत' के ज़रिए सियाचिन पर कब्ज़े के बाद से ही भारत चाहता है कि पाकिस्तान ज़मीनी स्थिति को ही वास्तविक स्थिति स्वीकार करे तभी कोई समझौता होगा. यहाँ तैनात सैनिकों में से 79 प्रतिशत सैनिक 16 हज़ार फीट की ऊँचाई पर तैनात हैं और हर साल सात हज़ार सैनिकों को वहाँ रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. कहावत है कि यहाँ की भूमि इतनी बंजर है कि जिगरी दोस्त और जानी दुश्मन के अलावा कोई नहीं आता. फिर भी दोस्ती करने में लगे दो 'दुश्मनों' के बीच होड़ लगी है कि 78 किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर पर कब्ज़ा किसका रहे. | इससे जुड़ी ख़बरें सैनिकों के लिए भावनात्मक मुद्दा है सियाचिन30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस सियाचिन की ऊँचाइयों से30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मुश्किलों की लंबी सूची है सियाचिन पर25 मई, 2006 | भारत और पड़ोस सीमाएँ नहीं बदलेंगी: मनमोहन12 जून, 2005 | भारत और पड़ोस सियाचिन में युद्ध-विराम जारी रहेगा27 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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