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पाकिस्तान में बीबीसी उर्दू ख़बरों पर रोक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रसारण नियामक प्राधिकरण ने एफ़एम 103 से बीबीसी के उर्दू भाषा में प्रसारित होने वाले समाचार बुलेटिनों के प्रसारण पर रोक लगा दी है. हालांकि बीबीसी को अन्य स्थानीय एफ़एम रेडियो पर अपने समाचार प्रसारण की अनुमति मिली हुई है. पाकिस्तान प्रसारण नियामक प्राधिकरण के साथ बीबीसी का जो समझौता हुआ है उसके मुताबिक बीबीसी केवल ऐसे कार्यक्रमों को ही प्रसारित करेगा जो पहले से रिकॉर्ड किए हुए हों. बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक 22 जून से एक स्थानीय एफ़एम स्टेशन ने बीबीसी के समाचार बुलेटिनों को प्रसारित करने का काम शुरू कर दिया था. इस बारे में एफ़एम स्टेशन ने प्राधिकरण से अनुमति भी माँगी थी पर अनुमति प्राधिकरण के पास विचाराधीन ही रही और समाचार बुलेटिनों का प्रसारण शुरू हो गया. इसी पर कार्रवाई करते हुए प्राधिकरण ने 30 जून को ही बीबीसी के समाचार बुलेटिनों के इस एफ़एम स्टेशन से प्रसारण पर रोक लगा दी. हालांकि इस बाबत जब बीबीसी पाकिस्तान की ओर से प्राधिकरण से संपर्क किया तो अधिकारियों ने कहा कि उन्हें प्रसारण रोके जाने के पीछे के कारण नहीं मालूम हैं. मीडिया पर लगाम ग़ौरतलब है कि पिछले महीने ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में रेडियो और टेलीविज़न पर नियंत्रण के लिए कड़े नियमों को मंज़ूरी दी थी. पाकिस्तान की सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि वह किसी भी घटना के सीधे प्रसारण को रोकने के लिए क़ानून लाएगी. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले दिनों मीडिया को नियंत्रित करने वाले जिस अध्यादेश को मंज़ूरी दी थी उसके मुताबिक़ पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण को और अधिकार दिए गए हैं. पाकिस्तान प्रसारण नियामक प्राधिकरण किसी भी मीडिया संगठन के उपकरण ज़ब्त कर सकता है, कार्यालय को सील करता है और यहाँ तक कि उसका लाइसेंस भी रद्द कर सकता है. जानकारों बताते हैं कि ऐसा करके मीडिया की स्वतंत्रता को काफी नुकसान पहुँचाया गया है क्योंकि इससे मीडिया कई महत्वपूर्ण मामलों में खुलकर नहीं बोल सकेगा. मीडिया की इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसी वर्ष अप्रैल में पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के नाम लिखी गई एक ख़ुली चिट्ठी में पाकिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों पर चिंता जताई थी. इस चिट्ठी में बीबीसी उर्दू सेवा के संवाददाता दिलावर ख़ान के साथ हुई घटना का भी ज़िक्र किया गया था और कहा गया था कि नवंबर 2006 में पाकिस्तान के गुप्तचर संगठन आईएसआई के एजेंटों ने दिलावर ख़ान को कई घंटे तक अपहृत रखा और धमकियाँ दीं. | इससे जुड़ी ख़बरें अध्यादेश वापस लेने का आश्वासन09 जून, 2007 | भारत और पड़ोस महिला रेडियो पत्रकार की हत्या06 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने मीडिया पर लगाम कसी04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में मीडिया पर हमलों पर चिंता27 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस लोकतंत्र है भारत की सबसे बड़ी पहचान02 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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