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बुधवार, 27 जून, 2007 को 04:40 GMT तक के समाचार
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प्रतिभा पाटिल नए विवाद में घिरीं
प्रतिभा पाटिल, मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी के साथ
प्रतिभा पाटिल की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही विवाद उनके साथ चल रहे हैं
यूपीए और वामदलों की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल एक और विवाद में घिर गई हैं.

इस बार उन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा कि वे मृत आध्यात्मिक गुरु की आत्मा से बात कर चुकी हैं.

उनके इस कथित भाषण की एक सीडी टेलीविज़न चैनल दिखा रहे हैं.

हालांकि इस कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा है कि यह सीडी जोड़तोड़कर दिखाई जा रही है और प्रतिभा पाटिल की बात तो बिना संदर्भों के प्रस्तुत किया जा रहा है.

इससे पहले पर्दाप्रथा पर अपने बयानों से लेकर बैंक के कर्ज़ और हत्या के मामले में कथित रुप से भाई को बचाने जैसे कई विवाद उनकी उम्मीदवारी घोषित होने के बाद सामने आ चुके हैं.

आत्मा से बात?

प्रतिभा पाटिल ने राजस्थान की राज्यपाल की हैसियत से फ़रवरी में ब्रह्माकुमारी विश्व आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में भाग लेने माउंटआबू गई हुई थीं.

मीडिया में दिखाए जा रहे सीडी के मुताबिक़ उन्होंने अपने भाषण में कहा कि संस्था की प्रमुख हृदयमोहनी यानी दादीजी के शरीर में ब्रह्माकुमारी संस्था के संस्थापक दादा लेखराज की आत्मा आई और उस आत्मा ने उनसे बात की.

 हम अंधश्रद्धा में विश्वास नहीं करते. आत्मा से बात तो तभी हो सकती है जब वह शरीर में हो
मृत्युंजय, सचिव, ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय

इस सीडी में प्रतिभा पाटिल को कहते हुए दिखाया गया है, "मेरे लिए वह एक सुखद अनुभव था."

इस सीडी के बाद विवाद यह खड़ा हो गया है कि क्या ऐसे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार होना चाहिए जो आत्मा से बात करने का दावा कर रहा हो?

हालांकि बह्माकुमारी विश्वविद्यालय के सचिव मृत्युंजय ने बीबीसी से कहा कि यह विवाद बेबुनियाद है और जो सीडी मीडिया में दिखाई जा रही है वह जोड़तोड़ कर तैयार की गई है.

आत्मा से बात करने के विवाद पर वे कहते हैं, "हम अंधश्रद्धा में विश्वास नहीं करते. आत्मा से बात तो तभी हो सकती है जब वह शरीर में हो."

कांग्रेस ने इस विवाद को बेबुनियाद बताते हुए इसे खारिज कर दिया है. पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "सार्वजनिक जीवन में बहुत लोगों से मिलना पड़ता है और जिससे मिलें उसके जैसा तो कोई नहीं हो जाता."

 वामपंथी दलों ने यह कभी नहीं कहा था कि उम्मीदवार को आस्तिक या देवी-देवताओं को न मानने वाला होना चाहिए
प्रकाश करात, महासचिव, सीपीएम

इस विवाद पर जब सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, "वामपंथी दलों ने यह कभी नहीं कहा था कि उम्मीदवार को आस्तिक या देवी-देवताओं को न मानने वाला होना चाहिए."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "उम्मीदवार का नाम कांग्रेस ने तय किया है किसी बाबा ने नहीं."

विवाद-दर-विवाद

इससे पहले प्रतिभा पाटिल पर्दाप्रथा वाले अपने बयान से विवाद में घिर चुकी हैं. उन्होंने कह दिया था कि मुगलों के कारण राजस्थान की हिंदू महिलाओं ने पर्दा करना शुरु किया और अब इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए.

इस बयान के बाद इतिहासकारों ने प्रतिभा पाटिल को आड़े हाथों लिया था और कहा था कि उनका इतिहासबोध ठीक नहीं है.

फिर मीडिया में ख़बरें आईं कि उन्होंने महाराष्ट्र में एक बैंक से शक्कर का एक कारखाने के लिए करोड़ों (17 करोड़ से अधिक) का कर्ज़ लिया था और उसे चुकाया नहीं है.

एक हत्या के विवाद में भी उनका नाम लिया गया जिसमें कथित रुप से उनके भाई पर आरोप हैं. कहा गया था कि प्रतिभा पाटिल ने अपने भाई को बचाने का प्रयास किया था.

एक विवाद प्रतिभा पाटिल के पति देवीसिंह शेखावत से जुड़ा हुआ है. उन पर कथित रुप से एक व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप है. वह व्यक्ति उसी स्कूल में शिक्षक था जिससे देवीसिंह शेखावत जुड़े हुए थे.

इस मामले को ख़त्म करने के लिए शेखावत ने हाईकोर्ट में याचिका लगा रखी है.

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