BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 20 जून, 2007 को 10:26 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
कंडोम की बिक्री को लेकर छिड़ा विवाद

क्रेज़ेंडो
क्रेज़ेंडो को कंपनी ने मार्च में बाज़ार में उतारा था
मध्य प्रदेश में कंडोम के एक नए पैकेट ने विवाद पैदा कर दिया है. इस पैकेट में कंडोम के साथ कंपनी उत्तेजना पैदा करने वाला 'उपकरण' मुफ्त में दे रही है.

यह 'उपकरण' दरअसल एक 'वाइब्रेटिंग रिंग' यानी कंपन पैदा करने वाला छल्ला है.

विवाद है कि क्या इसे 'सेक्स ट्वाय' माना जाना चाहिए?

दरअसल, भारत में 'सेक्स टॉय' की बिक्री प्रतिबंधित है और इसे बेचने के लिए दो साल तक की सज़ा और दो हज़ार रुपए तक का ज़ुर्माना हो सकता है.

मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने कथित 'सेक्स ट्वाय' बेचे जाने की शिकायतों की जाँच कर रही है.

लेकिन ऐसे उपभोक्ता भी हैं जो इससे ख़ुश हैं और मानते हैं कि इस पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए.

दिलचस्प तथ्य यह है कि यह उत्पाद बेचने वाली कंपनी हिन्दुस्तान लेटेक्स लिमिटेड कोई बहुराष्ट्रीय या निजी कंपनी नहीं बल्कि भारत सरकार की एक कंपनी है.

विवाद

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड के 'क्रेज़ेंडो' ब्रांड के कंडोम के पैक कुछ लोगों के हाथ लगे.

एक सौ पच्चीस रुपये के इस कंडोम के पैक के साथ कंपनी उत्तेजना पैदा करने वाला एक यंत्र मुफ़्त दे रही है.

 इसका विरोध करना ग़लत है, जिसका दिल चाहे वो इस्तेमाल करे. जिसे अच्छा नहीं लगता है वो इसका इस्तेमाल न करे
कुणाल सिंह, उपभोक्ता

यही बात कुछ लोगों को नागवार ग़ुज़री. इसका विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि यह भारतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ है.

बजरंग दल के ज़िला संयोजक देवेंद्र रावत कहते हैं, "इस तरह की चीज़ें भारतीय संस्कृति को बिगाड़ती हैं, इस पर तो न सिर्फ़ मध्य प्रदेश में बल्कि पूरे देश में रोक लगानी चाहिए."

जब यह सवाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने उठाया गया तो उन्होंने पत्रकारों से कहा, "अगर हमें कुछ भी ग़लत लगा तो हम इस पर कार्रवाई करेंगे. भारतीय संस्कति के ख़िलाफ कुछ भी बर्दाशत नही किया जाएगा.″

राज्य के लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसके ख़िलाफ़ राज्य सरकार को एक चिट्ठी भी लिखी है.

उनका कहना है कि उन्हें ख़बर मिली है कि छात्र हॉस्टल में इसका प्रयोग कर रहे हैं और लगता है कि कंडोम के बहाने से 'सेक्स ट्वाय' बेचा जा रहा है.

उन्होंने कहा, " मुख्यमंत्री ने समुचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. इसे प्रदेश में किसी भी तरह से नही बेचने दिया जाएगा."

मगर कई लोग ऐसे भी हैं जिनहें ये उत्पाद काफ़ी भा रहा है. ऐसे ही एक उपभोक्ता हैं कुणाल सिंह उनका कहना है, "इसका विरोध करना ग़लत है, जिसका दिल चाहे वो इस्तेमाल करे. जिसे अच्छा नहीं लगता है वो इसका इस्तेमाल न करे."

शिवराज सिंह चौहान
मध्यप्रदेश सरकार ने अब तक कंपनी को कोई निर्देश नहीं दिए हैं

शहर में मेडिकल स्टोर चलाने वाले रवि भगनानी का कहना है कि इसको बेचने पर प्रतिबंध लगाना ग़लत होगा. वो कहते है कि उनके पास आने वाले लोग उनसे कुछ नया माँगते है और यह कंडोम पैकेट कुछ नया तो देता ही है.

वहीं कुछ लोग मानते हैं कि सरकार बेवजह की बातों में जनता को उलझाए रखना चाहती है. अंसार सिद्दीक़ी कहते हैं, "अगर ये बिकता भी है तो इससे जनता को क्या फ़ायदा या नुकसान है?″

वो कहते है कि ये इंसान की निजी ज़िंदगी में दख़ल है. उनका मानना है कि लोग इंटरनेट के ज़रिए भी इसको ख़रीद सकते है, इसलिये अगर राज्य में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगता भी है तो वो बेमानी होगा.

'सेक्स ट्वाय'

इस कंडोम पैकेट के साथ एक रिंग या छल्ला दिया जा रहा है. इस रिंग के साथ एक बैटरी लगी हुई है.

इसे लिंग पर चढ़ाया जा सकता है और इसे चालू करते ही इसमें कंपन शुरु हो जाता है.

कंपनी का कहना है कि इसका उपयोग कंडोम के साथ करने की सलाह की दी जाती है.

कंपनी का दावा है कि ये इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को लगभग बीस मिनट तक आनंद का अनुभव कराएगा.

जानकारी के मुताबिक ये यंत्र चीन में बना हुआ है.

क़ानून के मुताबिक़ भारत में 'सेक्स-ट्वाय' बेचने पर प्रतिबंध है. हालांकि इसमें 'सेक्स-ट्वाय' का ज़िक्र नहीं है लेकिन कहा गया है कि ऐसी कोई भी सामग्री जो समाज में अश्लीलता फ़ैलाए उसे बेचना क़ानूनन अपराध है.

भोपाल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जीके पाठक का कहना है कि भारतीय दंड विधान की धारा 292 के तहत ऐसा कोई सामान बेचने के लिए दो साल तक की सज़ा और दो हज़ार तक का ज़ुर्माना हो सकता है.

हालांकि उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की कि कंडोम के साथ बेची जा रही रिंग 'सेक्स-ट्वाय' है या नहीं.

'सेक्स ट्वाय नहीं'

हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड ने बीबीसी से कहा है कि उनका उद्देश्य 'क्रेज़ेंडो' के साथ दिए जा रहे रिंग को 'सेक्स-ट्वाय' की तरह बेचना नहीं है.

कंपनी की सफ़ाई
 यह शिकायत आम रही है कि लोगों को कंडोम के साथ यौन संबंध बनाकर संतुष्टि नहीं मिलती इसलिए कंपनी ने यह रिंग साथ में देने की योजना बनाई है ताकि कंडोम के साथ इसके उपयोग से आनंद में वृद्धि की जा सके
हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड

कंपनी ने कहा है कि यह कोई प्रतिबंधित उपकरण नहीं है और मार्च 2007 में जब कंपनी ने अपना उत्पाद बाज़ार में उतारा उससे पहले ही यह बाज़ार में था.

हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड का कहना है कि इस उत्पाद को लेकर अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है.

बीबीसी को भेजे गए अपने बयान में कंपनी ने कहा है, "यह शिकायत आम रही है कि लोगों को कंडोम के साथ यौन संबंध बनाकर संतुष्टि नहीं मिलती इसलिए कंपनी ने यह रिंग साथ में देने की योजना बनाई है ताकि कंडोम के साथ इसके उपयोग से आनंद में वृद्धि की जा सके."

बाज़ार में इसकी बिक्री रोकने से इनकार करते हुए कंपनी ने कहा है कि एक तो यह अकेला इस तरह का उत्पाद नहीं है जो बाज़ार में उपलब्ध है क्योंकि इस तरह के कई देशी-विदेशी उत्पाद पहले से ही बाज़ार में हैं.

दूसरे यदि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई निर्देश मिलते हैं तो कंपनी राज्य के बाज़ार से अपना यह उत्पाद क्रेंज़ेंडो को हटा लेगी.

पहला 'कंडोम बार'
भारत के एक सरकारी संगठन ने कंडोम बार खोलने की ज़रूरत क्यों महसूस की?
कंडोमज़्यादा बड़े कंडोम
एक शोध के अनुसार भारत में बिकने वाले कंडोम ज़रूरत से ज़्यादा बड़े हैं.
कंडोमएक इस्तेमाल यह भी
भारत में मुफ़्त बाँटे जाने वाले कंडोम का कुछ अलग ही इस्तेमाल हो रहा है.
कंडोम से चूड़ियाँकंडोम से चूड़ियाँ
ज़िम्बाब्वे में कुछ लोगों ने महिला कंडोम से रंग-बिरंगी चूड़ियाँ ही बना डालीं.
इससे जुड़ी ख़बरें
कंडोम बार चला रही है सरकार
03 मई, 2007 | भारत और पड़ोस
वेलेन्टाइंस डे की अनोखी मुहिम
14 फ़रवरी, 2007 | पहला पन्ना
महिला कंडोम से चूड़ियाँ बनाईं
10 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना
कंडोम से नहीं रुकता एड्स-वेटिकन
09 अक्तूबर, 2003 को | पहला पन्ना
भारत में कंडोम का प्रचार
16 जुलाई, 2003 | पहला पन्ना
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>