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'पूर्व चरमपंथी' की 'मौत' पर हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में सोमवार को एक पूर्व कश्मीरी चरमपंथी की मौत हुई और उसके संबंधियों ने उसकी मौत के लिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाया है. मंगलवार को उस युवक के संबंधियों और पूर्व कश्मीरी चरमपंथियों के एक संगठन मुत्तहिदा हक़ीक़ी मूवमेंट ने मुज़फ़्फ़राबाद में प्रदर्शन भी किया. बशीर अहमद उर्फ़ इरशाद नामक इस व्यक्ति के बारे में कहा जाता है कि वह 1990 के दशक में भारत प्रशासित कश्मीर से नियंत्रण रेखा पार करके मुज़फ़्फ़राबाद आ गया था और बाद में चरमपंथी गतिविधियाँ छोड़ कर मुत्तहदा हक़ीक़ी मूवमेंट नामक संगठन में शामिल हो गया था. इस मूवमेंट को ऐसे लोगों का संगठन बताया जाता है जो कभी कश्मीरी चरमपंथी रहे थे लेकिन अब यह संगठन शांति का समर्थक है. मुत्तहिदा हक़ीक़ी मूवमेंट के एक प्रतिनिधि जमील कश्मीरी ने बीबीसी को बताया कि कल तीन चार सादे कपड़े पहने और हथियारबंद लोग बशीर अहमद को एक होटल से पकड़कर ज़बरदस्ती एक कार में डाल कर ले गए. उस समय बशीर अहमद होटल में चाय पी रहा था. बशीर अहमद के संबंधियों का आरोप है कि उन हथियारबंद लोगों का संबंध पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई से था. उन्होंने बताया कि कुछ ही फ़ासले पर यातायात जाम होने की वजह से उस कार को भी रुकना पड़ा जिसमें बशीर अहमद को बिठाया गया था. बशीर अहमद स्थिति को भाँपकर कार से कूद गया और भागने की कोशिश की मगर जल्दबाज़ी में वह उस तरफ़ निकल गया जहाँ आगे नीलम नदी बहती थी. जमील कश्मीरी ने बताया कि हथियारबंद लोग बशीर अहमद को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागे और इस दौरान उन्होंने बशीर अहमद पर कम से कम तीन गोलियाँ चलाईं. वह बिल्कुल दिन का वक़्त था और वहाँ और लोग भी मौजूद थे. वह युवक या तो गोलियाँ लगने से नीलम नदी में गिर गया या फिर उसने दहशत की वजह ख़ुद नीलम नदी में छलांग लगाई. वह युवक नीलम नदी में बह गया और लगभग एक किलोमीटर के फ़ासले पर उसकी लाश ख़ुद किनारे पर आ गई. स्थानीय पुलिस ने उस युवक की लाश को अपने क़ब्ज़े में ले लिया और उसे मुज़फ़्फ़राबाद के सैनिक अस्पताल में पहुँचा दिया. लेकिन ये मालूम नहीं हुआ कि पुलिस ने उस वक़्त उस लाश का पोस्टमार्टम कराया था या नहीं. पूर्व कश्मीरी चरमपंथियों के संगठन मुत्तहिदा हक़ीक़ी मूवमेंट के कई सदस्य आज उस अस्पताल के सामने एकत्र हो गए और उन्होंने उस युवक की मौत के विरोध में प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उस युवक यानी बशीर अहमद का संबंध मुत्तहिदा हक़ीक़ी मूवमेंट से था और उनकी माँग थी की उस युवक की लाश उन्हें सौंप दी जाए ताकि वो उसका अंतिम संस्कार कर सकें. उस युवक के साथियों के अनुसार वह 1990 के समय में नियंत्रण रेखा पार करके मुज़फ़्फ़राबाद आया तो उसकी उम्र लगभग 17 वर्ष थी. | इससे जुड़ी ख़बरें भूस्खलन से 16 लोगों की मौत21 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस विश्वास बहाली के लिए कई नए उपाय14 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस भूकंप के साल भर बाद भी मदद का इंतज़ार08 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस वादी से फाँसी के तख़्ते तक का सफ़र03 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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