|
अमरिंदर सिंह की ज़मानत को चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंजाब सरकार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को भ्रष्टाचार के कथित मामलों में दी गई अग्रिम ज़मानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है. पंजाब सरकार के महाधिवक्ता एचएस मथेवाल ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से विशेष याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं जिन पर सोमवार को सुनवाई होगी. उन्होंने बताया कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कुछ अन्य लोग लुधियाना के विवादित सिटी सेंटर घोटाले में कथित रूप से अभियुक्त हैं पर इन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से 18 जुलाई तक की ज़मानत मिली हुई है. अब राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री समेत अन्य लोगों को दी गई ज़मानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की याचिकाएँ दायर की हैं ताकि अमरिंदर सिंह समेत अन्य अभियुक्त बनाए गए लोगों से पूछताछ की जा सके. महाधिवक्ता ने बताया, "इस घोटाले के संदर्भ में दिल्ली के व्यापारी चेतन गुप्ता से पूछताछ में जो बात सामने आई हैं उन्हें भी इन याचिकाओं का हिस्सा बनाया गया है." साथ ही हाई कोर्ट के इस आदेश को भी चुनौती दी जा रही है जिसमें कहा गया है कि अमरिंदर सिंह से पूछताछ के लिए कम से कम चार दिन पहले उन्हें सूचित करना अनिवार्य होगा. कसता घेरा दरअसल, इस मामले की शुरुआत तब हुई जब पिछले वर्ष लुधियाना के सिटी सेंटर में घोटाले का कथित मामला सामने आया और इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके कुछ क़रीबी लोगों पर आरोप लगाए गए. तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की जाँच राज्य सतर्कता ब्यूरो को सौंप दी पर सतर्कता ब्यूरो की रिपोर्ट जनवरी 2007 में आई जब राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी थी. अमरिंदर सिंह ने इस रिपोर्ट को यह कहते हुए सार्वजनिक नहीं किया कि राज्य में आने वाली सरकार इस रिपोर्ट पर कोई फ़ैसला लेगी. फरवरी में हुए चुनावों में अमरिंदर सिंह की सरकार की हार हुई और राज्य में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बन गई. मामला सतर्कता ब्यूरो ने प्रकाश सिंह बादल के सत्तासीन होने के तीन हफ़्ते बाद ही गत 18 मार्च को अमरिंदर और 18 अन्य के ख़िलाफ़ इस घोटाले में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के अलावा कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष एचएस हंसपाल, पूर्व शहरी विकास मंत्री चौधरी जगजीत सिंह और लुधियाना सुधार न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष परमजीत सिंह सिबिया को भी नामजद किया गया. बाद में अमरिंदर सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार बीआईएस चहल को भी इस मामले में अभियुक्त बनाया गया. अमरिंदर सिंह ने अपने बचाव के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से ज़मानत भी ले ली. अमरिंदर की पत्नी और पुत्र रनिंदर सिंह को हालाँकि इस मामले में नामजद नहीं किया गया लेकिन उन्होंने भी ऐहतियातन हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत ले ली थी. बढ़ता विवाद इसी मामले में पिछले दिनों पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने दिल्ली के एक व्यापारी चेतन गुप्ता को भी गिरफ़्तार कर उनसे पूछताछ की.
व्यापारी चेतन गुप्ता पटियाला के नामचीन व्यापारी सेठ चरनदास के पोते हैं और उनके अमरिंदर सिंह के परिवार से क़रीबी संबंध बताए जाते हैं. चेतन गुप्ता का नाम पिछले दिनों वोल्कर मामले में भी सामने आया था. राज्य सतर्कता ब्यूरो ने संदेह के आधार पर चेतन गुप्ता को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की. गिरफ्तारी के दौरान ब्यूरो ने चेतन के पास से एक पेन ड्राइव भी बरामद किया जिसमें कथित रूप से इस घोटाले से संबंधित जानकारी मिलने की बात कही गई है. पूछताछ के बाद सतर्कता ब्यूरो ने बताया कि बातचीत में चेतन ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अमरिंदर सिंह समेत कुछ और लोगों के पैसे भी हवाला के ज़रिए बाहर भेजे हैं. ब्यूरो के मुताबिक चेतन ने पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह और उनके बेटे जगत सिंह का भी नाम लिया है. उन्होंने कथित रूप से यह भी माना है कि वो एक हवाला डीलर है. सतर्कता ब्यूरो के मुताबिक़ पेन ड्राइव से जो जानकारियाँ मिलीं हैं उसमें विदेश में क़रीब 170 खातों की बात भी सामने आई है. हालाँकि पूछताछ से निकली जानकारियों के बारे में जब पंजाब सरकार के महाधिवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जाँच हो रही है और वो इस बारे में कुछ कहना उचित नहीं समझते. खंडन हालांकि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अपने ऊपर लगे आरोपों का बार-बार खंडन करते रहे हैं.
उन्होंने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उनपर लगाए गए आरोपों का सिरे से खंडन किया और कहा कि इसमें उनके पीछे साजिश रची गई है. अमरिंदर सिंह के वकील का भी कहना है कि चेतन से ज़बरदस्ती ऐसे बयान दिलवाए गए हैं. उसे इस तरह की बातें कहने के लिए मजबूर किया गया है. साथ ही उन्होंने पेन ड्राइव में मिली जानकारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि इस सबूत को उनके ख़िलाफ़ जानबूझकर तैयार किया गया है और इसका सच्चाई से कुछ लेना-देना नहीं है. कमज़ोर कैप्टन चंडीगढ़ से पत्रकार असित जौली ने बताया कि लुधियाना के सिटी सेंटर घोटाला मामले में कथित रूप से लिप्त पूर्व मुख्यमंत्री अब राजनीतिक रूप से भी कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं. चिंता की बात यह है कि आरोपों से घिरते अमरिंदर सिंह के बचाव में कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई पहल नज़र नहीं आ रही है. अमरिंदर सिंह को राज्य में प्रकाश सिंह बादल से मिली हार के बाद कांग्रेस विधायक दल का नेता तक नहीं बनाया गया और राज्य कांग्रेस की बागडोर भी उनके हाथ नहीं दी गई. वहीं कांग्रेस के आला नेता इस बारे में कहते हैं कि अदालत जो निर्णय करेगी, पार्टी उसे स्वीकार करेगी. यानी कुल मिलाकर सत्ता से बाहर हुए अमरिंदर सिंह राजनीति के गलियारों में भी पिछड़ते नज़र आने लगे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरिंदर सिंह के सलाहकार गिरफ़्तार11 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अमरिंदर की सतर्कता ब्यूरो के सामने पेशी28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस अमरिंदर सिंह की गिरफ़्तारी पर रोक05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अमरिदंर सिंह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज24 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस अमरिंदर को चुनाव आयोग का नोटिस10 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||