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उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता गिरी है और लगभग 10 फ़ीसदी कॉलेजों में ही अच्छी शिक्षा मिल रही है. बंगलौर के नेशनल असेसमेंट काउंसिल ने एक सर्वेक्षण किया है जिसके मुताबिक 90 फ़ीसदी कॉलेजों और 68 फ़ीसदी विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता या तो मध्यम दर्जे की है या ख़राब. अगर ये आँकड़े सही हैं तो बौद्धिक संपदा के लिए दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ने वाला भारत क्या भविष्य में भी अपनी गुणवत्ता कायम रख सकेगा. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष सुखदेव थोराट कहते हैं, "यह सच है कि सभी संस्थानों का स्तर एक जैसा नहीं है पर यूजीसी के सभी संस्थानों को न्यूनतम मानदंडो का पालन करना पड़ता है." प्रधानमंत्री भी शिक्षा की गुणवत्ता से चिंतित नज़र आते हैं. इस गिरावट के लिए हाल के दिनों में भारी तादाद में उभर आए शिक्षण संस्थानों की ओर नज़र जाती है. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष पीएम भार्गव भी मानते हैं कि सभी संस्थानों में एक जैसी शिक्षा नहीं मिल रही है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थानों को छोड़ दें तो देश में ऐसे तमाम संस्थानों की कमी नहीं है जहाँ बुनियादी ढाँचे से लेकर शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में संदेह है और इनका स्तर सुधारने की ज़रूरत है. | इससे जुड़ी ख़बरें पढ़ाई के विरोधी पड़ोसी की शिकायत13 जून, 2007 | भारत और पड़ोस यौन शिक्षा को लेकर मचा बवाल23 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'उच्च शिक्षा 20 प्रतिशत जनता को मिले'03 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस स्कूलों में सूर्य नमस्कार करवाने पर विवाद25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अनिवार्य विषय बने अंग्रेज़ी: ज्ञान आयोग14 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस शिक्षा व्यवस्था और दलित समाज05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुसलमानों के लिए आधुनिक शिक्षा योजना30 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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