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पढ़ाई के विरोधी पड़ोसी की शिकायत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई की दो मुसलमान छात्राओं ने अदालत से गुहार की है कि उन्हें उनके पड़ोसी से बचाया जाए जो उनकी पढ़ाई में अड़ंगा लगा रहा है. उनका कहना है कि उनके पड़ोसी और उनके अन्य साथियों ने न सिर्फ़ उन्हें धमकाया बल्कि उनके घर में घुस कर उनके माता-पिता और उनके भाइयों को मारा पीटा. उनको कथित रुप से धमकी दी गई है कि वह अपनी लड़कियों को उच्च शिक्षा न दिलाएँ क्योंकि इस्लाम इसकी इजाज़त नहीं देता है और अगर उन्होंने इस पर अमल नहीं किया तो इसके और बुरे परिणाम हो सकते हैं. जस्टिस रंजना देसाई और जस्टिस दिलीप भोसले की खंडपीठ ने इस याचिका पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए उस इलाक़े के थाने को आदेश दिया है कि वह छात्राओं और उनके परिवार को धमकी देने वालों से राहत दिलाए वर्ना अदालत को इस केस को अपने हाथ में लेने पर मजबूर होना पड़ेगा. पुलिस थाने के इंचार्ज को भी 18 जून तक अदालत के सामने हाज़िर होकर इस केस की पूरी तफ़सील पेश करने का आदेश दिया गया है. उन्नीस वर्षीया समीना मोहम्मद यासीन सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा है और उनकी 18 वर्षीय छोटी बहन ज़रीना महाराष्ट्र कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष में हैं. दोनों बुर्क़ा पहनने पर मजबूर हैं. एक साल बर्बाद हुआ ज़रीना की मां हसीना बानो के अनुसार जब उनके बेटियों ने दसवीं की परीक्षा पास की उसके बाद उस आदमी की धमकियों की वजह से उनकी बेटियों का एक साल बर्बाद भी हो गया. समीना ने 10वीं में 80 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. समीना का कहना है कि उन लोगों ने इस पड़ोसी की बात न मानते हुए उच्च शिक्षा जारी रखी तो उसने अपनी दहशत क़ायम रखने के लिए उन्हें और उनके माता-पिता को सताना शुरू कर दिया. सात मार्च को जब वह दोपहर के समय अपने दरवाज़े के बाहर एक स्टूल पर बैठ कर पढ़ रही थी तो इस पड़ोसी ने कथित रुप से उसके सिर पर लकड़ी मारी और बेहूदा गालियाँ दीं. समीना का कहना है कि वह इसकी रिपोर्ट लिखवाने पुलिस थाने पहुँचीं लेकिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट लिखने के बजाय बदतमीज़ी करने वाले पड़ोसी की ख़ातिरदारी की. समीना और ज़रीना के मुताबिक़ उसके बाद इसी पड़ोसी और उसके साथियों ने 11 मई को उनके घर में घुस कर उनकी माता, पिता और भाई पर हमला किया जिसके कारण उनके पिता और भाई को आठ दिन तक इलाज के लिए हस्पताल में दाख़िल होना पड़ा. लेकिन मुल्ज़िम मोहम्मद अली को एक ही दिन में ज़मानत मिल गई और उनकी धमकियों का सिलसिला नहीं थमा तो आख़िरकार उन्होंने अदालत का सहारा लिया. चाल में रहने वाले अन्य लोग भी इस पड़ोसी से त्रस्त हैं, वहीं रहने वाली सना आबिद कहती हैं कि "अगर हम कहीं खड़े हो गए तो हमें गंदी गालियां देकर गंदी बात करता है और उसका मतलब है कि सारी लड़कियां सिर्फ़ बुर्क़े में ही रहें और हमारे माता-पिता पर हुक्म चलाता है कि सबकी जल्दी से जल्दी शादियाँ कर दें". मोहम्मद अली की मां सादिक़ निसार ने इस बात को स्वीकार किया कि उनका बेटा धार्मिक है लेकिन वह उसे मना करती हैं कि वह किसी की बेटी के बारे में कुछ न कहे.
इलाक़े से फ़रार मोहम्मद अली के घर के बाहर दरवाज़े पर दरवाज़े पर फ़्रेम में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कथन लिखे हुए हैं और वह इलाक़े से फ़रार बताया जाता है. नागपाड़ा पुलिस थाने के इंचार्ज पुलिस अधिकारी एबी सावंत ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि "पुलिस अपने तौर पर केस की छानबीन कर रही है और यह बात ग़लत है कि पुलिस ने सात मार्च को उन छात्राओं का केस नहीं लिया था". सावंत का कहना है कि 11 मई को पुलिस ने मोहम्मद अली और उसके साथियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था लेकिन अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि पुलिस का मोहम्मद अली की हिमायत करती है. मदनपुरा एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, यहाँ की लड़कियाँ अब उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं लेकिन आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जो लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का विरोध करते हैं और उनके कारण लड़कियां बुर्क़ा पहनने पर मजबूर हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पुलिसकर्मियों ने ली पढ़ाने की जिम्मेदारी19 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अंग्रेज़ी नहीं बोलने पर दाखिला नहीं21 जून, 2006 | भारत और पड़ोस मदरसों में बढ़ती हिंदू छात्रों की संख्या31 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'ब्रिटेन के छात्र देश को नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं'25 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना 'रैगिंग' पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश16 मई, 2007 | भारत और पड़ोस यौन शिक्षा को लेकर मचा बवाल23 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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