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सोमवार, 28 मई, 2007 को 09:33 GMT तक के समाचार
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विकास को लग सकता है झटका: मनमोहन
मनमोहन सिंह
बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बिजली नीति बनाई है
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में बिजली की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे विकास की रफ़्तार को झटका लग सकता है.

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में नौ से दस प्रतिशत की वृद्धि दर सुनिश्चित करने के लिए बिजली आपूर्ति में तेज़ी से सुधार करना ही होगा.

सोमवार को मनमोहन सिंह राजधानी दिल्ली में बिजली क्षेत्र पर आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

व्यस्त सत्र में 13 फ़ीसदी तक की बिजली कटौती का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र में बहुत सुधार नहीं दिखाई दे रहा है और अगर इस कमी को वर्ष 2012 से पहले पूरा करना है तो ‘त्वरित कार्यक्रम’ शुरू करने होंगे.

चिंता

प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर हम हर साल 9 से 10 फ़ीसदी तक की विकास दर की उम्मीद करते हैं तो इसी अनुपात में बिजली उत्पादन भी बढ़ाना ज़रूरी है.”

 अगर हम हर साल 9 से 10 फ़ीसदी की विकास दर की उम्मीद करते हैं तो इसी अनुपात में बिजली उत्पादन भी बढ़ना ज़रूरी है
मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

उन्होंने कहा, “हम बिजली उत्पादन में बढ़ोत्तरी और इसकी आर्थिक सेहत में सुधार सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठा सके हैं.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्युत प्रेषण और वितरण के बीच बढ़ता फासला चिंता की बात है.

उन्होंने कहा, “कई राज्यों में प्रेषण और वितरण के बीच नुकसान का स्तर 30 से 40 फ़ीसदी के बीच है. इस नुक़सान से बिजली क्षेत्र की आर्थिक सेहत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है.”

चुनौती

भारत की वर्ष 2012 से पहले बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 78 हज़ार 577 मेगावाट करने की योजना है.

यह उत्पादन मुख्य रूप से ताप बिजलीघरों के ज़रिए करने की योजना है ताकि बिजली आपूर्ति के संकट का सही ढंग से मुक़ाबला किया जा सके.

राष्ट्रीय बिजली नीति के तहत वर्ष 2012 से पहले देश की एक अरब से अधिक आबादी की मौजूदा आपूर्ति में लगभग 50 फ़ीसदी का इजाफ़ा करने का लक्ष्य रखा गया है.

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक लाख़ मेगावाट बिजली की ज़रूरत होगी.

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