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शनिवार, 26 मई, 2007 को 18:12 GMT तक के समाचार
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मुशर्रफ़ को इफ़्तिख़ार की परोक्ष चेतावनी
इफ़्तिख़ार चौधरी
इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में हज़ारों लोग एकत्रित होने लगे हैं
पाकिस्तान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी ने इस्लामाबाद में अपने हज़ारों समर्थकों को संबोधित किया है.

अपने संबोधन में इफ़्तिखार चौधरी ने राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पर परोक्ष रुप से हमला करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को ज़रुरत से अधिक अधिकार ख़तरनाक हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का यह सम्मेलन सिर्फ़ वकीलों के लिए बुलाया गया था लेकिन सम्मेलन स्थल के बाहर एक बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी जहाँ बड़ी भीड़ ने उन्हें देखा और सुना और इसका टेलीविज़न पर सीधा प्रसारण किया गया.

यह सम्मेलन भी उस अभियान का हिस्सा था जिसमें वे अपनी बर्खास्तगी का विरोध कर रहे हैं और फिर से मुख्य न्यायाधीश के पद पर बहाल किए जाने की माँग कर रहे हैं.

 कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार अलग-अलग होने चाहिए. जैसा कि संविधान में लिखा हुआ है
इफ़्तिख़ार चौधरी

दो हफ़्ते पहले कराची में हिंसा के कारण इफ़्तिख़ार चौधरी की रैली रद्द कर दी गई थी. इस हिंसा में कम से कम चालीस लोगों की जानें गईं और कई दिनों तक शहर अशांत रहा.

उल्लेखनीय है कि मार्च में राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए इफ़्तिख़ार चौधरी को मुख्य न्यायाधीश के पद से बर्खास्त कर दिया था.

चौधरी इस आरोप का खंडन करते हैं और पूरे देश में हज़ारों लोगों ने उनका समर्थन किया है.

आरोप

कराची में हुई हिंसा के बाद हुए इस सम्मलेन को एक प्रतीक के रुप में देखा गया है जिसमें विपक्षी दलों ने बता दिया है कि विरोध का दबाया नहीं जा सकता.

कराची की घटना के बाद से पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग ले रहे इफ़्तिख़ार चौधरी राजधानी इस्लामाबाद में अपने हज़ारों समर्थकों के साथ पहुँचे.

उनके समर्थक सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे और उनका शासन ख़त्म करने की माँग कर रहे थे.

अपने संबोधन में पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार अलग-अलग होने चाहिए. जैसा कि संविधान में लिखा हुआ है."

उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति या किसी एक संस्था के पास ज़रुरत से ज़्यादा अधिकार ख़तरनाक हो सकता है.

इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थकों का आरोप है कि परवेज़ मुशर्रफ़ न्यायालय को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं.

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ पहली बार ऐसा विरोध झेल रहे हैं

उनका कहना है कि इस सेना अध्यक्ष के तौर पर और राष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल को मिलने वाली चुनौतियों के चलते वे ऐसा कर रहे हैं.

इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन ने पाकिस्तान में एक तरह से परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ एक लहर पैदा कर दी है.

आठ साल पहले तख़्ता पलट कर सत्ता पर काबिज होने के बाद पहली बार परवेज़ मुशर्रफ़ को इतने बड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

पाकिस्तान के बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश अपनी बर्खास्तगी का विरोध करने के बहाने लोगों को एक विकल्प सुझा रहे हैं. इसमें एक सैन्य शासक के बदले एक न्यायपालिका की आज़ादी और लोकतंत्र की ओर लौटने का रास्ता शामिल है.

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