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असम में तीन और हिंदीभाषियों की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर राज्य असम में हिंदीभाषी लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा और बुधवार को हिंदीभाषी मजदूरों पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई. ताज़ा घटनाएँ राज्य के शिवसागर और गोलाघाट ज़िलों में हुई हैं. इससे पहले मंगलवार को दो गांवों में हुए अलगाववादियों के हमलों में कम से कम छह हिंदीभाषियों की मौत हो गई थी. मंगलवार के हमले डिब्रूगढ़ ज़िले के एक गांव में हुए थे जहाँ अलगाववादी विद्रोहियों के हमले में कम से कम पाँच मज़दूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए. इसके अलावा एक अन्य गांव में हुए विद्रोहियों के हमले में एक हिंदीभाषी मज़दूर मारा गया था. हिंसा ग़ौरतलब है कि इससे पहले भी चरमपंथी हिंदी भाषी लोगों को अपने हमलों का निशाना बनाते रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें असम के बाहर से आए लोगों को निशाना बनाया गया है. पिछले पाँच महीनों के दौरान राज्य में हिंदीभाषी प्रवासियों के ऊपर हुए हमलों में अबतक कम से कम 80 लोगों की जानें जा चुकी हैं. इसके जवाब में पिछले तीन महीनों के दौरान राज्य पुलिस और सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 30 से भी ज़्यादा चरमपंथी मारे जा चुके हैं. इनमें अलगाववादी संगठन के कुछ वरिष्ठ कमांडर भी शामिल हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें असम में हिंदीभाषियों पर हमला, छह मरे15 मई, 2007 | भारत और पड़ोस असम की हज़ारों लापता महिलाओं की कहानी11 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'असम में जनमत संग्रह कराया जाए'18 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों के ख़िलाफ़ भारत-बर्मा एकजुट15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसा, 48 लोग मारे गए06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हमले, 14 की मौत05 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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