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रविवार, 18 फ़रवरी, 2007 को 13:29 GMT तक के समाचार
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'असम में जनमत संग्रह कराया जाए'

असम
अल्फ़ा का कहना है कि असम की स्थिति पर निष्पक्ष जनमत संग्रह हो
पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विद्रोही संगठन अल्फ़ा ने कहा है कि इस मुद्दे पर जनमत संग्रह होना चाहिए कि असम भारत का हिस्सा बना रहे या नहीं.

एक बयान में अल्फ़ा की सैन्य वाहिनी के प्रमुख परेश बरुआ ने कहा कि वे असम की संप्रभुता के सवाल पर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं.

परेश बरुआ ने कहा, "हमने राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन बिना किसी हमले या हिंसा के संपन्न होने दिया. इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम कमज़ोर है, जैसा कि केंद्र सरकार समझ रही है."

इस मामले में भारत सरकार का रुख़ स्पष्ट है कि असम या देश के किसी अन्य हिस्से में उठने वाली अलगाववादी माँगों पर देश के संविधान के दायरे में ही बातचीत हो सकती है, यानी अलग देश की माँग को स्वीकार करने पर चर्चा नहीं हो सकती.

अल्फ़ा की ओर से यह बयान एक ई-मेल के ज़रिए बीबीसी सहित कुछ अन्य समाचार माध्यमों को भेजा गया.

अल्फ़ा नेता की ओर से ऐसा बयान तब आया है जब राज्य की राजधानी में राष्ट्रीय खेलों का रंगारंग समापन हुआ है.

'नहीं लिए पैसे'

बरुआ ने इन आरोपों का भी सिरे से खंडन किया जिनमें कहा गया था कि राज्य सरकार और अल्फ़ा के बीच राष्ट्रीय खेलों के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर एक समझौता हुआ है और इसके लिए उन्हें एक बड़ी राशि दी गई है.

 हमने राज्य में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन बिना किसी हमले या हिंसा के संपन्न होने दिया. इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि हम कमज़ोर है, जैसा कि केंद्र सरकार समझ रही है
परेश बरुआ, अल्फ़ा नेता

उन्होंने कहा कि ऐसे समाचार उनके ख़िलाफ़ प्रचारित किए गए हैं पर वो किसी से भी कोई समझौता तब तक नहीं कर सकते जब तक कि असम की संप्रभुता को स्वीकार नहीं कर लिया जाता है.

उन्होंने कहा कि अल्फ़ा की ओर से खेलों का शांतिपूर्ण आयोजन होने देने की वजह असम के कुछ शीर्ष खिलाड़ियों की ओर से की गई अपील है.

दरअसल, अल्फ़ा और केंद्र सरकार के बीच जारी संघर्ष विराम पिछले वर्ष के आखिर में ख़त्म हो गया. तब से अल्फ़ा की ओर से हुए हमलों में 100 से भी ज़्यादा हिंदीभाषी लोगों की जान जा चुकी है.

अल्फ़ा ने राष्ट्रीय खेलों का आयोजन न होने देने की धमकी भी दी थी पर बाद में इस दौरान हिंसक गतिविधियाँ रोक देने की घोषणा की थी.

बरुआ ने केंद्र सरकार के साथ फिलहाल किसी भी बातचीत की संभावना से भी इनकार किया और कहा कि राष्ट्रीय खेलों के दौरान जहाँ एक ओर अल्फ़ा ने अपना अभियान बंद रखा वहीं भारतीय सेना की ओर से उन पर हमले होते रहे.

उन्होंने कहा कि अल्फ़ा इसका उचित जवाब देगा.

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