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ग़दर की वर्षगाँठ, मेरठ से रैली शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
1857 के विद्रोह की 150 वीं वर्षगांठ पर मेरठ से दिल्ली तक की रैली शुरू हो गई है. सन् 1857 के प्रथम विद्रोह की 150वीं वर्षगांठ की स्मृति में भारत में व्यापक आयोजन किए जा रहे हैं. मेरठ के विक्टोरिया पार्क से शुरू हुई रैली इसी का एक हिस्सा है. इसमें देश भर से आए लगभग 10 हज़ार युवा हिस्सा ले रहे हैं. मेरठ शहर के कई हिस्सों और शिवाजी पार्क से होते हुए रैली ने बाईपास के रास्ते दिल्ली के लिए रवाना हुई. ख़ास बात ये है कि इस रैली की अगुवाई 85 घोड़े कर रहे हैं. ये घोड़े प्रथम स्वाधीनता संग्राम में मेरठ में शहीद हुए उन सैनिकों की शहादत का प्रतीक हैं, जिन्होंने चर्बीदार कारतूसों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. जहाँ कल तक ये आरोप लग रहे थे कि यह रैली कांग्रेस और नेहरू युवा केंद्र के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई है, लेकिन सोमवार को जब रैली विक्टोरिया पार्क से दिल्ली कूच के लिए रवाना हुई तो भारतीय जनता पार्टी समेत कई हिंदुवादी संगठनों ने फूलमालाओं से और दीप जलाकर रैली का स्वागत किया. रैली को सोमवार को मोदीनगर में रोक दिया जाएगा, इसके बाद रैली अगले दिन दिल्ली के लिए रवाना होगी. इससे पूर्व, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर और युवा मामलों के मंत्री मणिशंकर अय्यर ने सोमवार सुबह रैली को हरी झंडी दिखाई. यह 11 मई को दिल्ली के लाल क़िले पर पहुँचेगी. उल्लेखनीय है कि 1857 में हिंदुस्तानी सैनिकों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ मेरठ से बग़ावत की शुरुआत की थी. विद्रोह की जो चिंगारी मेरठ से उठी थी उसकी जद में पूरा देश में आ गया था. रविवार को केंद्रीय खेल और युवा मामलों के मंत्री मणिशंकर अय्यर और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने मेरठ में 'जंगे आज़ादी' के आयोजनों की शुरुआत की. रैली के बारे में नेहरू युवा केंद्र के शकील अहमद ख़ान कहते हैं,'' इसमें अंडमान निकोबार से लेकर जम्मू कश्मीर तक के लोग हिस्सा ले रहे हैं.'' 11 मई को लाल क़िले में आयोजित होने वाले समारोह में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, उपराष्ट्रपति भैंरोंसिंह शेखावत, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी हिस्सा लेंगे. |
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