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'बदलते मौसम से भारत को भारी ख़तरा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए गठित आईपीसीसी ने चेतावनी दी है कि 'ग्लोबल वार्मिंग' के कारण भारत के समुद्रतटीय इलाक़े जलमग्न हो सकते हैं. आईपीसीसी के चेयरमैन आरके पचौरी ने दिल्ली में जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रीय प्रभाव पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि बढ़ते तापमान का असर समुद्र पर बढ़ता जा रहा है. उन्होंने आईपीसीसी की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि समुद्र के नीचे तीन हज़ार मीटर तक का दायरा बढ़ते तापमान से प्रभावित हो रहा है. पचौरी का कहना था, "मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे शहर इसकी चपेट में आ सकते हैं. सुंदरवन कोलकाता के लिए रक्षा की दीवार का काम करता है लेकिन अब यह ख़ुद संकट में हैं. समुद्री जलस्तर बढ़ने पर मुंबई में जलनिकासी प्रणाली ख़तरे में पड़ जाएगी और बड़ा संकट सामने होगा." जब उनसे ये पूछा गया कि कुछ देश रिहायशी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सफलतापूर्वक समुद्री सीमा का अतिक्रमण कर रहे हैं, तो उनका कहना था कि यह पद्धति कितनी कारगर होगी, कहना मुश्किल है. स्वास्थ्य पचौरी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियाँ सामने आ रही हैं. आईपीसीसी रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ते तापमान के कारण डायरिया और कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं. पचौरी ने कहा कि डेंगू बुख़ार का जलवायु परिवर्तन से सीधा संबंध है और इस बीमारी का फैलाव भारत और चीन में हो सकता है. उन्होंने आंध्रप्रदेश के लिए किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ वर्ष 2003 में गर्म हवाओं का दौर सबसे लंबा खिंचा. पचौरी ने कहा कि इस तरह का 'हीट वेव' अब पहले के मुक़ाबले लंबा खिंच सकता है और इससे सतर्क रहने की ज़रूरत है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1860 से अब तक सबसे ज़्यादा गर्मी वर्ष 1990 के बाद से अब तक रिकॉर्ड की गई है. पचौरी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्षा चक्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इसके कारण भारत में अनाजों का उत्पादन घटने की आशंका है. उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम में औसत तापमान आधा फ़ीसदी बढ़ने पर गेहूं की पैदावार लगभग आधा टन प्रति हेक्टेयर कम हो सकती है. प्रबंधन पचौरी ने कहा कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए सबसे अधिक ज़रूरी है जल प्रबंधन पर ध्यान देना. उनका कहना था कि भारत में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ से निपटने के लिए ऐसा करना ज़रूरी है. लू से बचने के लिए उन्होंने पूर्व चेतावनी जारी करने की सलाह दी और लोगों को इससे सतर्क रहने को कहा. ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए पचौरी ने ग्रीन हाउस गैसों का ऊत्सर्जन कम करने पर बल तो दिया लेकिन इस मुद्दे पर विकसित और विकासशील देशों के बीच जारी खींचतान पर चिंता भी जताई. |
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