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मंगलवार, 03 अप्रैल, 2007 को 12:03 GMT तक के समाचार
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न्यायाधीश के निलंबन पर विरोध-प्रदर्शन
इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी
जस्टिस चौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ एक बार फिर लोगों में गुस्सा दिखा
पाकिस्तान में मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है. मंगलवार को देश भर में इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए.

इस बीच मंगलवार को जस्टिस इफ़्तिखार चौधरी न्यायिक सुनवाई के लिए सर्वोच्च न्यायिक परिषद के सामने प्रस्तुत हुए.

पाकिस्तान में मुख्य न्यायाधीश को हटाए जाने की घटना से लोगों में भारी रोष और गुस्सा है.

मंगलवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में लोग पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय के सामने इकट्ठा होकर मुख्य न्यायाधीश को हटाने का विरोध करने लगे.

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखार चौधरी को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने नौ मार्च को हटा दिया था.

गुस्से में वक़ील

गुस्साई भीड़ में वक़ील और राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के राजनैतिक विरोधी शामिल थे.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता फ़िल मैकी ने बताया कि इफ़्तिख़ार चौधरी की कार पहुँचते ही लोग अदालत में घुस गए.

इस भीड़ में वक़ीलों की संख्या अधिक थी और ये झंडे लहराते हुए मुशर्रफ़ विरोधी नारे लगा रहे थे.

बहुत से लोग बैनर लिए हुए थे जिन पर 'डाउन विद मुशर्रफ़' और 'मुशर्रफ़, किलर ऑफ़ जस्टिस' लिखा हुआ था.

सर्वोच्च न्यायालय के एक वक़ील मोहम्मद इक़राम चौधरी ने बीबीसी से कहा कि ये विरोध लोकतंत्र के लिए संघर्ष का प्रतीक था.

 हम मानते हैं कि अब वक़्त आ गया है हम सेना की तानाशाही से मुक्त हों. हम न्याय-व्यवस्था की स्वतंत्रता और पाकिस्तान के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. ये संघर्ष पाकिस्तान में संवैधैनिक शासन और लोकतंत्र के लिए है
वक़ील इक़राम चौधरी

उन्होंने कहा,"हम मानते हैं कि अब वक़्त आ गया है हम सेना की तानाशाही से मुक्त हों. हम न्याय-व्यवस्था की स्वतंत्रता और पाकिस्तान के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. ये संघर्ष पाकिस्तान में संवैधानिक शासन और लोकतंत्र के लिए है."

विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ वक़ीलों ने काली कोट पहने लोगों को पीट दिया. वक़ीलों का कहना था कि ये लोग राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

पाकिस्तान के लाहौर और कराची शहरों में भी विरोध-प्रदर्शन हुए.

लाहौर में वक़ीलों और राजनैतिक कार्यकर्ताओं को बंदी बनाए जाने के बाद भी प्रदर्शन ज़ारी रहा. इन दोनों शहरों के न्यायालयों में काकामज न के बराबर हुआ.

इफ़्तिख़ार चौधरी को हटाए जाने के बाद से कई न्यायाधीश और वक़ील अपने पदों से इस्तीफ़ा दे चुके हैं.

इन विरोध प्रदर्शनों के चलते वक़ील और पुलिस में कई बार हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का कहना है कि उन्होंने संविधान के दायरे में रहते हुए काम किया है. लेकिन विधि विशेषज्ञ मुशर्रफ़ के इस दावे को गलत बताते हैं.

पाकिस्तान में इफ़्तिख़ार चौधरी न्यायिक स्वतंत्रता के बड़े पैरोकार के रूप में मशहूर थे जिससे राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ परेशान हो गए थे.

जस्टिस चौधरी पर अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए अपने लड़के को प्रतिष्ठित सरकारी पद दिलवाने का आरोप है.

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