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'दाढ़ी बनाई तो ख़ैर नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में बाजौर इलाके के नाइयों को चेतावनी मिली है कि अगर वे दाढ़ी बनाने का काम बंद नहीं करेंगे तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. पाकिस्तान के इस उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के खार इलाके में नाइयों को ऐसे पर्चे मिले हैं जिनपर चेतावनी लिखी हुई है कि अगर उन्होंने अपने यहाँ आने वाले ग्राहकों की दाढ़ी बनाई तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हालांकि इन पर्चों में चेतावनी देने वालों के बारे में हस्ताक्षर जैसी कोई जानकारी नहीं है. ग़ौरतलब है कि बाजौर का इलाका अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास स्थित है और इस बात की आशंका जाहिर की जा रही है कि इस इलाके में तालेबान समर्थक चरमपंथियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है. जिन दिनों अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की हुकूमत थी तब उनकी ओर से लागू किए गए कट्टर इस्लामिक नियमों के तहत दाढ़ी रखने को अनिवार्य बताया गया था. इन नाइयों को मिले पर्चे में लिखा है, "ऐसे लोग जो पैगंबर के समय से चली आ रही परंपरा को दाढ़ी हटाकर तोड़ रहे है, उन्हें ऐसा करने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे." 'दाढ़ी नहीं बनेगी' स्थानीय लोगों ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि क़रीब 20 हज्जामों ने अपनी दुकानों के बाहर सूचना लगाकर स्पष्ट किया है कि वे दाढ़ी नहीं बनाएंगे. ऐसे ही एक हज्जाम बताते हैं, "हमारा 90 प्रतिशत करोबार तो दाढ़ी बनाने पर ही आधारित था. अब हमारे पास एक तरह से कोई काम ही नहीं है." ग़ौरतलब है कि बाजौर का इलाका पिछले कुछ समय से चरमपंथी गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है. पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में पाकिस्तान सरकार ने एक मदरसे पर हवाई हमला किया था जिसमें कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई थी. सरकार का कहना था कि इस मदरसे का इस्तेमाल चरमपंथियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'दाढ़ी हटाओ या फिर नौकरी से जाओ'26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मंहगी पड़ी लंबी दाढ़ी11 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस खिलाड़ी ही नहीं, दाढ़ी भी नंबर वन29 दिसंबर, 2005 | खेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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