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गुरुवार, 25 जनवरी, 2007 को 13:51 GMT तक के समाचार
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बच्चों के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं:कलाम
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि बच्चों के साथ क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

उन्होंने निठारी कांड का ज़िक्र किए बिना इस तरह के अपराधों के लिए कड़ी सज़ा की माँग की.

राष्ट्रपति का कहना था, "पिछले कुछ दिनों में बच्चों के ख़िलाफ़ हुए अपराधों से पूरा देश स्तब्ध रह गया और हम सब पर काले धब्बे छोड़ गया. बच्चों के साथ क्रूरता सामाजिकता के ख़िलाफ़ है जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता."

उन्होंने बच्चों के साथ अपराध के मामलों की अदालत में तेज़ सुनवाई और इसके लिए कड़ी सज़ा की ज़रूरत बताई.

राष्ट्रपति ने आह्वान किया है कि ऐसे शिक्षित और प्रशिक्षित युवा तैयार करने का सिलसिला तेज़ किया जाए जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभाओं का लोहा मनवाएँ.

 पिछले कुछ दिनों में बच्चों के ख़िलाफ़ हुए अपराधों से पूरा देश स्तब्ध रह गया और हम सब पर काले धब्बे छोड़ गया. बच्चों के साथ क्रूरता सामाजिकता के ख़िलाफ़ है जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता
राष्ट्रपति कलाम

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि व्यवस्था को इस तरह से विकसित किया जाए जिसमें कोई भी सक्षम और प्रतिभाली छात्र समुचित शिक्षा और प्रशिक्षण पाने से वंचित नहीं रह पाए.

राष्ट्रपति ने देश वासियों, सशस्त्र सेनाओं और अर्द्धसैनिक बलों को शुभकामनाएँ पेश कीं, "भारत के 58वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मैं देश और विदेश में रहने वालों का अभिवादन करता हूँ."

राष्ट्रपति ने कहा, "मैं देश की सशस्त्र सेनाओं और अर्द्धसैनिक बलों का ख़ास अभिवादन करता हूँ जो ज़मीन पर, समुद्र में और हवा में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं. मैं केंद्रीय और राज्य स्तर के अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस को भी शुभकामनाएँ देता हूँ."

राष्ट्रपति ने सशस्त्र सेनाओं और सुरक्षा बलों की प्रशंसा करते हुए कहा, "इन सेवाओं के बहुत से जवानों ने राष्ट्र, राष्ट्रीय ध्वज और हमारे लोगों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है, हम उन्हें सलाम करते हैं."

शिक्षा और प्रशिक्षण

राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षिक संस्थानों को विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनवाने में सक्षम ऐसे शिक्षित और प्रशिक्षित युवा तैयार करने चाहिए जो अपने ज्ञान और हुनर में विशिष्ठ हों."

राष्ट्रपति ने कहा कि हर साल लगभग एक करोड़ युवा रोज़गार क्षेत्र में क़दम रख रहे हैं और उन्हें विश्व स्तर के मानकों के अनुसार शिक्षित और प्रशिक्षित किया जा रहा है जो अन्य देशों के लिए मानव संसाधन साबित हो रहे हैं.

प्रशिक्षण
 निर्माण, लकड़ी का सामान बनाने, बिजली उपकरणों की मरम्मत, मैकेनिकल प्रणाली, फ़ैशन, डिज़ाइन, नर्स, वकालत, अकाउंटेंसी, बिक्री और मार्केटिंग, सॉफ़्टवेयर और सेवा क्षेत्र में उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए
राष्ट्रपति कलाम

उन्होंने कहा कि वर्ष 2040 तक भारत में पचास प्रतिशत युवाओं की पहुँच उच्च शिक्षा तक होनी चाहिए और जो युवा उच्च शिक्षा तक नहीं पहुँचते हैं उन्हें निर्माण, लकड़ी का सामान बनाने, बिजली उपकरणों की मरम्मत, मैकेनिकल प्रणाली, फ़ैशन, डिज़ाइन, नर्स, वकालत, अकाउंटेंसी, बिक्री और मार्केटिंग, सॉफ़्टवेयर और सेवा क्षेत्र में उच्च स्तर का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए.

राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कहा, "यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण लक्ष्य है जिसमें तमाम विश्वविद्यालय, शिक्षाविद, विशेषज्ञ, कॉलेज, व्यासायिक प्रशिक्षण संस्थान, बैंकिग संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र अहम भूमिका अदा कर सकते हैं."

उन्होंने कहा कि हमारे देश में शिक्षण और प्रशिक्षण व्यवस्था को इस तरह से काम करना चाहिए कि कोई भी इच्छुक छात्र अच्छी शिक्षा और प्रशिक्षण से वंचित ना रहे.

डॉक्टर कलाम ने यह भी कहा कि छात्रों को इस दिशा में प्रेरित करने और उन्हें अवसर मुहैया कराने की यह मुहिम स्कूल स्तर से ही शुरू करनी होगी.

उन्होंने कहा कि कॉलेज स्तर की शिक्षा के दौरान छात्रों को ऐसे अनेक मौक़े मिल सकते हैं जिनमें वे अपने कारोबारी हुनर दिखाना शुरू कर सकते हैं और उन्हें नए कारोबार शुरू करने के लिए भी प्रशिक्षित करना चाहिए.

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