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सांप्रदायिक हिंसा के ख़िलाफ़ क़ानून:कलाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने शुक्रवार को संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के लिए जल्द ही एक क़ानून लाया जाएगा. संसद के बजट सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कलाम ने कहा कि सरकार उन तत्त्वों से सख़्ती से निपटेगी जो हिंसा फैलाने की कोशिश करेंगे या देश की क़ानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करेंगे. उन्होंने कहा कि देश में शांति व्यवस्था क़ायम रखी जाएगी और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का ख़याल रखा जाएगा. सरकार की नीतियों का ख़ाका पेश करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस साल देश की अर्थव्यवस्था का विकास दर सात फ़ीसदी तक रह सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार ग़रीबों की आय का ध्यान रखेगी और क़ीमतों पर नियंत्रण स्थापित करेगी. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अगले सप्ताह वार्षिक बजट में 'ग्रामीण भारत' का विशेष ध्यान रखा जाएगा. घोषणा हर तरह के ख़तरे से निपटने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति कलाम ने कहा कि सरकार आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के लिए जल्द ही व्यापक क़ानून लाने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे ख़तरों से कड़ाई से पेश आएगी. राष्ट्रपति कलाम ने कहा, "सरकार आतंकवाद या देश में घृणा फैलाने और क़ानून-व्यवस्था से छेड़छाड़ करने वालों के ख़िलाफ़ कोई भी क़दम उठाने से नहीं चूकेगी." उन्होंने कहा कि आतंकवाद निरोधक क़ानून (पोटा) इसलिए ख़त्म किया गया क्योंकि इसका ग़लत इस्तेमाल हो रहा था लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़तरों से निपटने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता कमज़ोर हुई है. उन्होंने कहा कि पिछले साल कुल मिलाकर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था नियंत्रण में रही. उन्होंने कहा कि सरकार को जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद, पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही गतिविधियाँ और कुछ राज्यों में नक्सली हिंसा के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा पर ख़तरा महसूस होता है. उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए हमें न सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावी बनाना होगा बल्कि लोगों में ऐसी भावना पनपने के कारणों तक जाने की भी कोशिश करनी होगी. प्राथमिकता राष्ट्रपति कलाम ने अपने संबोधन में सरकार की कई प्राथमिकताएँ भी गिनाईं. उन्होंने कहा कि सरकार मुद्रा स्फ़ीति की दर को नियंत्रण में रखने की कोशिश करेगी क्योंकि इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित ग़रीब तबका ही होता है.
उन्होंने कहा कि मानसून की अच्छी बारिश न होने और तेल की क़ीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बावजूद वित्त वर्ष 2004-05 में देश का विकास दर रिकॉर्ड सात प्रतिशत तक पहुँच सकता है. राष्ट्रपति कलाम ने कहा कि सरकार रोज़गार के क्षेत्र में विशेष ध्यान देगी और कृषि, निर्माण, आधारभूत और सेवा क्षेत्र में विकास दर बढ़ाने की कोशिश करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार विकास और मानवाधिकार की रक्षा पर भी ध्यान देगी. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में और निवेश की बात कही और कहा कि देश में शिक्षा क्रांति की आवश्यकता है. राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा देश हमारी शैक्षणिक व्यवस्था की गुणवत्ता पर ही निर्भर है. |
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