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अल्फ़ा ने हिंदीभाषियों को फिर चेतावनी दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा ने हिंदीभाषियों को एक बार फिर असम छोड़ने की धमकी दी है. अल्फ़ा ने अपने न्यूज़लैटर, फ्रीडम को विभिन्न समाचार पत्रों के कार्यालयों में भेजा है जिसमें कहा गया है,'' हम हिंदी भाषियों से अपील करते हैं कि संघर्ष के इन दिनों में वे असम से दूर रहें.'' अल्फ़ा का कहना है कि असम के हिंदीभाषियों से पहले भी अपील की गई थी लेकिन चेतावनियों के बावजूद वे यहाँ टिके रहे. माना जा रहा है कि इस तरह पहली बार अल्फ़ा ने हिंदीभाषियों पर हमले को न्यायोचित ठहराने की अपील की है. असम पुलिस की गुप्तचर शाखा के प्रमुख खगेन सरमा का कहना है,'' अल्फ़ा ने पहली बार हत्याओं की ज़िम्मेदारी ली है और उसे न्यायोचित ठहराने की कोशिश की है.'' अल्फ़ा ने भारत के गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के बहिष्कार की भी घोषणा की है. ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों की हिंसा में 70 लोगों को मार दिया गया था जिसमें अधिकतर हिंदीभाषी थे जो वहाँ मजदूरी करते थे. सैन्य अभियान दूसरी ओर असम में सुरक्षाबलों ने अल्फ़ा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया है जिसमें हज़ारों सैनिक भाग ले रहे हैं. इस अभियान के तहत अनेक पहाड़ी इलाक़ों में कार्रवाई की जा रही है जिनमें अरुणाचल प्रदेश से लगने वाला इलाक़ा भी शामिल है. असम में इस हिंसा को लगभग एक दशक में सबसे भीषण कहा जा रहा है और इसमें जो लोग अल्फ़ा विद्रोहियों का निशाना बने उनमें से ज़्यादातर ईंट के भट्टों में काम करते थे. इस हिंसा के बाद असम में रहने वाले हज़ारों हिंदीभाषियों का पलायन शुरू हो गया है. असम में रहने वाले हिंदी भाषी लोगों के शिविरों का केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी दौरा किया था. दोनों नेताओं ने लोगों को विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अल्फ़ा हिंसा छोड़े तो बातचीत संभव'12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अल्फ़ा के ख़िलाफ़ बर्मा से सहयोग10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अल्फा के ख़िलाफ़ सैनिक अभियान09 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में सैनिक छावनी के पास धमाका08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसा जारी, तनाव का माहौल07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसा, 48 लोग मारे गए06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम शांति वार्ता शुरु करने की कोशिश13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस असम में संघर्षविराम ख़त्म, कार्रवाई शुरु24 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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