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अल्फ़ा के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होः लालू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने असम के हिंसा प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया है. अपनी इस यात्रा के बाद उन्होंने बीबीसी हिंदी सेवा के राजेश जोशी से एक विशेष बातचीत की. पीड़ित बिहारी मज़दूरों को आप किस तरह दिलासा दे सकते हैं? मैंने तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ के हिंसा प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया है. मेरे साथ असम के राज्यपाल, केंद्रीय सिंचाई मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव और रेलवे के कई अधिकारी थे. हम उन कैंपों में भी गए जहाँ पीड़ित परिवारों को रखा गया है. लोग वहाँ बहुत आतंकित हैं जैसा कि इस तरह की घटनाओं के बाद होता है. मैंने महसूस किया कि असम के आम लोगों इन लोगों के साथ हैं, यह असल में प्रतिबंधित संगठन अल्फ़ा की कार्रवाई है जिसका वजूद समाप्त हो गया है और अपनी मौजूदगी जताने के लिए इस तरह के हमले कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे बिहार में रणवीर सेना के लोग ग़रीब मज़दूरों को मारकर भाग जाते हैं. लोगों में काफ़ी आतंक है. न सिर्फ़ आतंक है बल्कि लोग बहुत बड़े पैमाने पर रेलगाड़ियों में भरकर भाग रहे हैं? अरे भाई, हम तो फ़ील्ड में गए थे, तिनसुकिया डिब्रूगढ़ से सब देखकर आ रहे हैं. पैनिक की ज़रूरत नहीं है जब इस तरह की घटना होती है तो स्वाभाविक है कि लोग घबरा जाते हैं. ऐसी कोई भयावह स्थिति...अ.. वहाँ लोग हैं डटे हुए हैं और लंबे समय से कहते रहे हैं कि हमें सुरक्षा दी जाए. सिर्फ़ बिहार ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों के भी लोग हैं जो कई पीढ़ियों से उनकी समृद्धि में योगदान देते रहे हैं. यह बिहार की जनता और असम की जनता की लड़ाई नहीं है, यह तो चरमपंथी तत्व हैं जो हमला कर रहे हैं. लोगों में चिंता ज़रूर है कि उनका क्या होगा, मैंने अभी प्रधानमंत्री जी से भी इस बारे में बात किया है. आप केंद्र में मंत्री हैं, सरकार पर दबाव डाल सकते हैं कि अल्फ़ा से बातचीत की जाए, अगर बातचीत नहीं की जाएगी तो वे हिंसा पर उतारू तो हो ही सकते हैं. मेरा तो ये विचार है कि इस तरह की स्थिति में हमें कोई बातचीत नहीं करनी चाहिए. वहाँ ऐसे तत्वों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए. कोई जान मारे, हत्या करे और कहे कि हमसे बात करो तो मैं इसके बिल्कुल पक्ष में नहीं हूँ. अगर कश्मीर में बात हो सकती है तो असम में क्यों नहीं? देखिए बात हो या न हो वह अलग बात है, बातचीत एक अलग विषय है जो केंद्र सरकार देखेगी. यहाँ तक मामला लोगों को बचाने का है, राष्ट्रीय सदभावना को कायम रखने का है. मैंने सुझाव दिया है कि लोग बिखरे हुए हैं और भयभीत हैं इसलिए उन्हें एक जगह जमा करके उन्हें ठोस सुरक्षा दीजिए और उनका हौसला बढ़ाइए. और जो लोग घर जाना चाहते हैं उनको ठीक तरीक़े से घर भिजवाया जाए. लोक जनशक्ति पार्टी जैसी कुछ पार्टियों ने राजनीतिक आंदोलन की बात कही है, असम जाने वाली रेलों को रोकने की धमकी दी है, क्या आप भी ऐसे आंदोलन की बात सोचते हैं? नहीं, ये बिल्कुल ग़लत है. अगर किसी ने ऐसा कहा है तो यह बहुत बैड है, दिस इज़ बैड. | इससे जुड़ी ख़बरें केंद्र सरकार की टीम असम रवाना07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसा जारी, तनाव का माहौल07 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हिंसक हमलों में 53 की मौत06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस असम में हमले, 14 की मौत05 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस गुवाहाटी में सेना की तैनाती पर विचार25 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विशेषाधिकार क़ानून में सुधार किए जाएंगे'02 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस हिंसा के बाद असम के शहर में कर्फ़्यू19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस असम में झड़प: सात लोगों की मौत18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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