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सिवान में क़ानून-व्यवस्था पर चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिवान – यूँ तो बिहार का ये मशहूर शहर राजधानी पटना से केवल डेढ सौ किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन उबड़-खाबड़ बदहाल सड़कों के ज़रिए इस दूरी को पूरा करने में पाँच से छ घण्टे तक लग जाते हैं. ऐसा लगता है मानो ये राजधानी पटना से कोसों दूर हो. लेकिन तब भी ये सीवान की सबसे बड़ी समस्या नहीं. यहाँ और भी कई समस्याएँ हैं जिनमें प्रमुख है क़ाऩून व्यवस्था. ज़ाहिर है बीबीसी रोड शो के दौरान सीवान में यही चर्चा को विषय बना. बाहुबलियों के इस शहर में जहाँ कई लोग इस विषय पर ख़ास टिप्पणी करने से कतराते नज़र आए वहीं कुछ ऐसे भी थे जिन्होने पुलिस प्रशासन और राजनीतिक नेताओं के बीच की कथित साँठ-गाँठ की जमकर निंदा की.
कुछ लोगों ने खुलकर पुलिस की गैर ज़िम्मेदाराना हरकतों को सार्वजनिक करने में कोइ कसर नही छोड़ी और एक-एक कर अपनी आपबीती को सबके सामने रखा. ऐसे में पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार को स्वीकार करना पड़ा कि पुलिस पूरी तरह से ‘दोस्त’ की तरह बर्ताव नही करती. चर्चा के दौरान बार बार इस बात पर ज़ोर डाला गया कि लोगों को अपने हकों के लिए लड़ाई जारी रखनी होगी. अगर न्याय पाना है तो न्याय के लिए लड़ना भी होगा. इसी निष्कर्ष के साथ बीबीसी हिंदी का कारवाँ अब बढ़ रहा है अपने अंतिम पड़ाव, गोपालगंज की ओर, जँहा लोगों से भेट होगी 25 दिसम्बर को. | इससे जुड़ी ख़बरें क्यों प्यासा है देवों का घर10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस ...कितना खुला-खुला है यहाँ का जीवन07 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बिजली पैदा करनेवाले क्षेत्र की ही बिजली गुल27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी हिंदी का रोड शो बिहार पहुँचा24 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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