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मुंबई के तेंदुओं की जंगल वापसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में वन अधिकारियों का कहना है कि लोगों पर हमला करने वाले 17 तेंदुओं को उनके ठिकानों पर वापस भेजा जा रहा है. पिछले दो सालों में इन तेंदुओं ने संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के आसपास रहने वाले 22 लोगों को मार डाला था. इसके बाद इन्हें पकड़कर पिंजरों में बंद कर दिया गया था. तेंदुओं को दो-दो की जोड़ी बनाकर छोड़ा जा रहा है. अधिकारियों को उम्मीद है कि इन जानवरों और लोगों के बीच के संबंधों को व्यवस्थित किया जा सकेगा. पर्यावरणवादियों का कहना है कि तेंदुओं को बंदी बनाकर रखना उचित नहीं है. तेंदुओं की लुप्त होती प्रजातियाँ पर्यावरणवादियों के लिए चिंता का कारण है. संजय गांधी उद्यान मुंबई में स्थित है और यहाँ की बढ़ती आबादी लगातार उद्यान की तरफ़ सरकती जा रही है जिसके कारण जानवरों और लोगों के बीच जगह के लिए संघर्ष बढ़ता जा रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि इन तेंदुओं को शहरों की तरफ़ जाने से रोकने के लिए ज़रूरी है कि उनके भोजन के लिए अधिक से अधिक जानवरों की व्यवस्था की जाए. पिछले कुछ सालों में इन जानवरों ने अपने ठिकानों से निकल कर शहर की तरफ़ स्थित जंगलों में प्रवेश कर 22 लोगों को मार डाला था. मरने वालों में अनेक बच्चे भी शामिल थे. इसके बाद 20 तेंदुओं को पकड़ लिया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली की फैक्ट्री में घुसा तेंदुआ | भारत और पड़ोस मुंबई में तेंदुए भी उतरे सड़कों पर16 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस उत्तरांचल का नरभक्षी तेंदुआ मारा गया15 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस नरभक्षी बाघ को पकड़ने के प्रयास03 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस तीन 'आदमख़ोर' तेंदुए पकड़े गए29 जून, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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