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मंगलवार, 16 दिसंबर, 2003 को 18:13 GMT तक के समाचार
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मुंबई में तेंदुए भी उतरे सड़कों पर

मुंबई का पवई क्षेत्र
मुंबई में पवई के पास के राष्ट्रीय उद्यान से तेंदुए रिहाइशी इलाक़ों में आ जाते हैं

अगर ये पूछा जाए कि तेंदुए कहाँ रहते हैं तो बच्चा भी बता देगा कि जंगल में या शहरों के चिड़ियाघरों में.

मगर भारत की महानगरी मुंबई के पवई इलाक़े में ऐसा नहीं है और वहाँ तेंदुए खुलेआम सड़कों पर भी देखे जा सकते हैं.

अब ऐसे में या तो तेंदुए ही सड़क पर चलें या आम आदमी. इसलिए मुंबई के इस आधुनिक और विकसित इलाक़ों में एक गिने जाने वाले हिस्से के लोग इन तेंदुओं से बचने की तरक़ीबों में लगे हैं.

लोगों ने इनसे बचने के लिए जाल बिछा लिए हैं और कुछ ने तो पिंजरे तक ख़रीद लिए हैं, यानी शहर में आ गया है जंगल का ख़ौफ़.

शहर में तेंदुओं की इस ग़श्त के बारे में अधिकारी कहते हैं कि ये तेंदुए नज़दीक़ के जंगल संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान से आते हैं.

इस इलाक़े की बड़ी-बड़ी इमारतों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की जगह पहले घने जंगल हुआ करते थे.

मगर पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय उद्यान के आस-पास के जंगलों को काटकर उनकी जगह इमारतें खड़ी कर दी गईं. इससे जानवरों के लिए ज़्यादा जगह या खाना नहीं बचा.

साथ ही उन्हें रिहाइशी इलाक़ों में लावारिस कुत्ते शिकार के लिए आसानी से मिल जाते हैं.

राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी एआर भारती इसके लिए इंसानों को ही दोषी मानते हैं.

दहशत और रोमाँच

वह कहते हैं कि लोग राष्ट्रीय उद्यान में जाकर घूमने लगते हैं. लोगों को हर चीज़ अपने लिए चाहिए और वे जानवरों को मार देने की बात करते हैं तो क्या धरती पर ख़ाली इंसान ही रहेगा बाक़ी कुछ नहीं.

मुंबई आईआईटी
मुंबई आईआईटी के छात्रों में तेंदुओं को लेकर उत्साह और रोमाँच दोनों है

तकनीकी पढ़ाई में हिंदुस्तान के बेहतरीन संस्थानों में गिने जाने वाला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी भी पवई में ही है और इसके हरे-भरे बड़े परिसर में भावी इंजीनियरों के साथ ही तेंदुए भी घूमते दिख जाते हैं.

संस्था की जनसंपर्क अधिकारी अरुणा दीक्षित कहती हैं कि अब सुरक्षा के लिए और क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है.

वह कहती हैं कि इसके लिए बाड़ लगाने के बारे में सोचा जा रहा है.

वैसे आम आदमी भले ही डरा हुआ हो मगर आईआईटी के छात्र बहादुरी और रोमाँच की वजह से तेंदुए को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं.

ऐसे ही एक छात्र अनुज प्रधान पहले तो ऐश्वर्य राय के प्रशंसक थे मगर अब शायद इस तेंदुए के दीवाने हो चले हैं और उससे एक मुलाक़ात को बेचैन भी हैं.

अनुज के अनुसार वही एकमात्र छात्र हैं जिन्होंने अभी तक तेंदुए को वहाँ नहीं देखा है. वह कहते हैं कि अगर वह उसे नहीं देख पाए तो ये बहुत ही शर्म की बात होगी.

जंगल के अधिकारी कहते हैं कि वे राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर 92 किलोमीटर लंबी और दस फुट ऊँची दीवार बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

मगर जब तक ये दीवार नहीं बनती जानवर और इंसान के बीच ये लुकाछिपी चलती ही रहेगी.

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