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शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 18:15 GMT तक के समाचार
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भ्रूण हत्या रोकने में पंडितों की मदद
साधु
सरकार की लिंग अनुपात की समस्या से निपटने के लिए धार्मिक लोगों से मदद लेने की योजना है
भारत का महिला और बाल कल्याण मंत्रालय भ्रूण हत्या रोकने और लिंग अनुपात की चिंताजनक स्थिति से निपटने के लिए पंडित और पुरोहितों की सहायता लेने की योजना बना रहा है.

महिला और बाल कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी का कहना है कि पंडित और पुरोहितों को बेटा पैदा होने के लिए 'दूधो नहाओ, पूतो फलो' जैसे आशीर्वाद देने बंद करने चाहिए.

उनका कहना है कि इसके बदले स्वस्थ बच्चों का आशीर्वाद दिया जाना चाहिए.

दरअसल महिला और बाल कल्याण मंत्री देश के लिंग अनुपात को लेकर खासी चिंतित हैं.

रेणुका चौधरी का कहना है,'' समस्या बहुत गंभीर है और मैं इस बारे में पंडितों और पुरोहितों से बात करूंगी.''

 समस्या बहुत गंभीर है और मैं इस बारे में पंडितों और पुरोहितों से बात करूंगी
रेणुका चौधरी, महिला और बाल कल्याण मंत्री

हालांकि उनकी इस पहल से इस क्षेत्र में काम करे संगठन सहमत नहीं हैं.

महिलाओं के क्षेत्र में काम कर रही सामाजिक शोध संस्थान की रंजना कुमारी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये धर्मगुरु भी इस समस्या के लिए ज़िम्मेदार हैं इसलिए इन लोगों से परिवर्तन की उम्मीद करना नासमझी है.

लिंग अनुपात पर चिंता

हाल में यूनिसेफ़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लिंग निर्धारण के कारण भारत में हर दिन सात हज़ार कम लड़कियाँ पैदा हो रही हैं.

लड़कियाँ
भारत में लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में बेहद कम है

यूनिसेफ़ ने सन् 2007 की रिपोर्ट में कहा है कि भारत के कुछ सबसे संपन्न राज्यों में सबसे ख़राब जनसंख्या अनुपात हैं.

देश में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या 934 है लेकिन पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में यह आँकड़ा काफ़ी कम है.

हरियाणा और पंजाब के 14 ज़िलों में तो प्रति एक हज़ार लड़कों पर लड़कियों की जनसंख्या 800 से भी कम है.

चिकित्सा पत्रिका लांसेट ने भी एक अध्ययन के बाद ये आशंका जताई थी कि पिछले बीस वर्षों में भारत में जन्म से पहले ही क़रीब एक करोड़ लड़कियों की भ्रूण हत्या हुई होगी क्योंकि ज़्यादातर माता-पिता अब भी भी लड़के के ही इच्छुक होते हैं.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, जो महिलाएँ पहले ही लड़की को जन्म दे चुकी हैं, वे अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल दोबारा लड़की न होने के लिए करती हैं.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रूण हत्या और शिशु हत्या के चलते भारत में लिंग असंतुलन लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं.

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