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निजी क्षेत्र में आरक्षण पर प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की अनुसूचित जातियों और जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने निजी क्षेत्र में आरक्षण की माँग उठाते हुए दिल्ली में एक रैली का आयोजन किया है. अनुसूचित जाति और जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ ने इसका आह्वान किया था. परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित राज ने आरोप लगाया, "संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को सत्ता में आए ढाई साल हो गए लेकिन उसने दलितों से किए वादे पूरे नहीं किए." उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार दलितों की माँगे नहीं मानती तो और उग्र कार्रवाई भी हो सकती है. अपने ज्ञापन में इस परिसंघ का कहना था कि समाज के कुछ वर्गों को आर्थिक उदारीकरण की नीतियों से काफ़ी फ़ायदा हुआ है लेकिन ये दलितों तक नहीं पहुँच पाया. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा समेत देश के विभिन्न राज्यों से दलित संगठनों ने इस रैली में भाग लिया. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने भी इस रैली में भाग लिया. रामविलास पासवान ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "जब तक निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू नहीं हो जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा." उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक संविधान में संशोधन करके क़ानून नहीं बनता तब तक उद्योगपति निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं देंगे. ग़ौरतलब है कि निजी क्षेत्र कहता आया है कि शिक्षा जैसे क्षेत्रों में दलितों को सुविधा प्रदान करने के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए. लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर निजी क्षेत्र और सरकार के बीच आम सहमति नहीं बन पाई है. | इससे जुड़ी ख़बरें निजी संस्थानों में आरक्षण विधेयक पारित21 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस निजी क्षेत्र में आरक्षण पर समिति बनी30 अगस्त, 2004 | कारोबार स्वायत्तता बनाम राजनीतिक दखलंदाज़ी06 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस सभी राज्यों में आईआईएम खोले जाएं28 मई, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण के विरोध में महारैली27 मई, 2006 | भारत और पड़ोस पिछड़ों को आरक्षण जून 2007 से23 मई, 2006 | भारत और पड़ोस किसके ज़िम्मे है सामाजिक न्याय का प्रश्न12 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण मुद्दे पर फिर विवाद उठा08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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