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राजस्थानी बच्चे को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान की राजधानी जयपुर के द्वारापुर गाँव में जन्मे 14-वर्षीय ओम प्रकाश गुर्जर को इंटरनेशनल चिल्ड्रंस पीस प्राइज़ यानि बच्चों का अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार दिया गया है. उन्हें बाल श्रम के ख़िलाफ़ संघर्ष करने के लिए ये पुरस्कार मिला है जिसके तहत किसी बाल परियोजना पर ख़र्च के लिए एक लाख डॉलर की राशि दी जाती है. हर साल दिए जाने वाले इस पुरस्कार की शुरुआत रोम में वर्ष 2005 में हुई थी. ये पुरस्कार किड्स राइट्स नाम की संस्था नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं के साथ मिलकर देती है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं का नेतृत्व अंतिम सोवियत राष्ट्रपति मिख़ाइल गोर्बाचौफ़ करते हैं. ओम प्रकाश गुर्जर को नीदरलैंड्स में द हेग में ये परस्कार दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति एफ़डब्ल्यू डी क्लर्क ने प्रदान किया. बाल मज़दूरी करनी पड़ी ओम प्रकाश को पाँच साल की उम्र में उनके माता-पिता से अलग कर दिया गया और उन्हें तीन साल तक दास प्रथा के तहत बाल मज़दूरी करने पर विवश किया गया. फिर उन्हें दास प्रथा से मुक्ति मिली और वे एक आश्रम में पढ़ाई करने और रहने लगे. उन्होंने राजस्थान में कई गाँवों को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने में योगदान दिया यानि उन गाँवों में बाल अधिकारों का सम्मान होता है और बाल मज़दूरी की इजाज़त नहीं होती. उन्होंने बच्चों की मुफ़्त पढ़ाई के लिए भी अभियान चलाया. ओम प्रकाश ने बच्चों को शोषण से बचाने के लिए बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र का एक अभियान चलाया. इस मकसद के लिए एक संस्था का गठन कर उन्होंने ख़ुद 500 ऐसे प्रमाण-पत्र बच्चों को दिलाए ताकि वे शोषण से बच सकें. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नेपाल में बच्चों की हत्या हो रही है'26 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस कंबोडिया में बंधक संकट समाप्त 16 जून, 2005 | पहला पन्ना कुछ बच्चों और महिलाओं को छोड़ा गया02 सितंबर, 2004 | पहला पन्ना अमरीकी कार्रवाई में 6 बच्चों की मौत10 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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