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शनिवार, 18 नवंबर, 2006 को 20:12 GMT तक के समाचार
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उसे चाहिए दुर्लभ 'बॉम्बे ब्लड ग्रुप' का ख़ून

अरविंद
दिल के मरीज़ अरविंद का इलाज अब ख़ून मिलने पर निर्भर है
छत्तीसगढ़ के एक अस्पताल में पिछले कई महीनों से 5 साल के अरविंद के ऑपरेशन की तैयारी चल रही है. उसके दिल में छेद है और वह कभी भी बेहोश हो जाता है.

डॉक्टर नवंबर के आख़िरी सप्ताह तक अरविंद का ऑपरेशन ज़रुरी मान रहे हैं लेकिन ज़िंदगी और मौत के बीच झूलते अरविंद के ऑपरेशन की तारीख़ लगातार टलती जा रही है.

अरविंद के ऑपरेशन के लिए कम से कम 5 युनिट ख़ून की ज़रुरत है लेकिन 2 करोड़ से अधिक की आबादी वाले छत्तीसगढ़ में अब तक इसका इंतजाम नहीं हो पाया है.

पड़ोसी राज्यों में भी अरविंद के ऑपरेशन के लिए ख़ून की तलाश की गई लेकिन सब तरफ़ से निराशा ही हाथ लगी.

इसका कारण है अरविंद का अलग रक्त समूह का होना.

राज्य के ब्लड बैंकों में सैकड़ों युनिट ए, एबी, बी और ओ रक्त समूह के ख़ून उपलब्ध हैं लेकिन ब्लड बैंक में अरविंद के रक्त समूह का ख़ून पिछले 100 सालों में भी कभी नहीं आया.

अरविंद 'बॉम्बे रक्त समूह' का है, जिसके बारे में आम लोग कम ही जानते हैं.

ओएच यानी 'बॉम्बे रक्त समूह'

'बॉम्बे रक्त समूह' पर लंबे समय से अध्ययनरत कोलकाता के डॉक्टर प्रशांत चौधरी बताते हैं कि 1950 के आसपास पहली बार तत्कालीन बम्बई में इस रक्त समूह का मामला सामने आया था, जिसे ओएच या 'बॉम्बे रक्त समूह' के नाम से जाना जाता है.

दुर्लभ समूह
 मेरे पास देश भर के केवल 53 लोगों की सूची है, जिन्हें 'बॉम्बे रक्त समूह' के रुप में चिन्हित किया गया है
डॉ प्रशांत चौधरी

मूल रुप से 'ओ' रक्त समूह से मिलते-जुलते इस ख़ून में एच एंटीजेन नहीं होता. इस कारण इस रक्त समूह के व्यक्ति को किसी और रक्त समूह का ख़ून नहीं दिया जा सकता.

'बॉम्बे रक्त समूह' को दुर्लभ में दुर्लभतम बताते हुए डॉ चौधरी कहते हैं-“ मेरे पास देश भर के केवल 53 लोगों की सूची है, जिन्हें 'बॉम्बे रक्त समूह' के रुप में चिन्हित किया गया है. देश के अधिकांश लोग अपना रक्त समूह नहीं जानते क्योंकि इस बारे में हमारे समाज में जागरुकता नहीं है .”

एक अनुमान के अनुसार देश भर में 0.013 प्रतिशत लोग 'बॉम्बे रक्त समूह' के हैं. लेकिन यह केवल अनुमान भर है.

अरविंद के मामले में भी अनुमान था कि छत्तीसगढ़ में ही सैकड़ों यूनिट 'बॉम्बे रक्त समूह' का ख़ून ऑपरेशन के समय मिल जाएगा लेकिन सारे अनुमान ग़लत साबित हुए.

परेशानी

बढ़ई का काम करने वाले अरविंद के पिता अश्विनी बघेल को जब अपने 5 साल के बेटे के दिल में छेद होने का पता चला था तो उन पर तो जैसे मुश्किलों का आसमान ही टूट पड़ा.

अरविंद अपने माता-पिता के साथ
अरविंद के माँ-बाप असहाय महसूस कर रहे हैं

बड़ी मेहनत से महीने में 3 हज़ार रुपए कमाने वाले अश्विनी ने राज्य शासन से मदद की गुहार लगाई. और राज्य शासन ने तत्काल ऑपरेशन के लिए डेढ़ लाख रुपए दिए भी.

लेकिन ऐन ऑपरेशन से दो दिन पहले रक्त जाँच के समय पता चला कि अरविंद 'बॉम्बे रक्त समूह' का है.

अरविंद के परिजन और डॉक्टर थोड़े परेशान तो हुए पर उन्हें उम्मीद थी कि थोड़ी कोशिश के बाद ऑपरेशन के लिए ज़रुरी 5 युनिट 'बॉम्बे रक्त समूह' के ख़ून का इंतजाम हो जाएगा. लेकिन कई राज्यों और देश के कई ब्लड बैंकों के महीने भर तक चक्कर काटने के बाद भी ख़ून का इंतजाम नहीं हो सका.

अपोलो अस्पताल, जहाँ अरविंद का इलाज चल रहा है, की डॉक्टर प्रेरणा मोहन मानती हैं कि ख़ून के अभाव में अरविंद का ऑपरेशन अब मुश्किल है. डॉक्टर प्रेरणा के अनुसार-“ हमने देश के दूसरे चिकित्सालयों से संपर्क साधा है, जहां न्यूनतम 'बॉम्बे रक्त समूह' का ख़ून होने पर भी ऑपरेशन संभव हो सकता है.”

अपने बेटे के ऑपरेशन की उम्मीद छोड़ चुके अश्विनी बघेल कहते हैं- “पहले तो सबसे बड़ी चिंता यही थी कि आख़िर अरविंद के ऑपरेशन के लिए इतने पैसे आएंगे कहां से? लेकिन जब पैसे आ गए तो अब लगता है कि जैसे किस्मत हमसे खेल खेल रही है.”

लेकिन क़िस्मत के इस खेल से बेख़बर मासूम अरविंद अपने बिस्तर पर सांप-सीढ़ी का खेल खेलते हुए पूछता है-“मैं ठीक हो जाउंगा न ?”

ज़ाहिर है, फ़िलहाल इस सवाल का जवाब तो किसी के पास नहीं है.

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