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कृत्रिम ख़ून का पहला सफल इस्तेमाल
डॉक्टरों ने मरीज़ के इलाज के लिए पहली बार कृत्रिम ख़ून का सफल इस्तेमाल किया है. स्टॉकहोम में कैरोलिंस्का अस्पताल के वैज्ञानिकों का कहना है कि दरअसल ये एक पाउडर है जिसे वर्षों तक सहेजकर रखा जा सकता है. इसे दान किए गए असली ख़ून से बनाया जा सकता है वहीं असली ख़ून ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ 42 दिन तक ही रखा जा सकता है. इसके बाद जब ज़रूरत हो तो उस पाउडर को घोलकर तरल बनाया जा सकता है और तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण बात ये है कि ज़रूरतमंद के ख़ून का वर्ग क्या है ये पता करने का कोई झंझट नहीं होगा. इस तरह ज़रूरतमंद को तुरंत ही ये ख़ून दिया जा सकेगा. अस्पताल के प्रमुख फ़िज़ीशियन डॉक्टर पियरे लाफ़ोली का कहना है कि अगर इस कृत्रिम ख़ून को अनुमति मिल जाती है तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में इससे ज़बरदस्त परिवर्तन आ सकते हैं. उन्होंने कहा, "अगर ये वास्तव में कारगर साबित होता है तो मानव के लिए ये एक बहुत बड़ा क़दम होगा. ये बिल्कुल चाँद पर पैर रखने जैसा होगा." डॉक्टर लाफ़ोली का कहना है कि दुर्घटना के बाद लगने वाला समय भी कृत्रिम ख़ून के इस्तेमाल से बचा सकते हैं. उनके अनुसार ख़ून देने से पहले उसका वर्ग पता करने में लगने वाला समय इससे बच जाएगा. तुरंत असर वैज्ञानिकों के अनुसार कृत्रिम ख़ून के मामले में ये भी देखा गया है कि ये असली ख़ून के मुक़ाबले कहीं अच्छी तरह से ऑक्सीजन को ले जा सकता है. इससे शरीर को होने वाले नुकसान भी सीमित हो जाएँगे और दिल का दौरा पड़ने जैसी परिस्थितियों में इसका काफ़ी फ़ायदा देखने को मिल सकता है.
डॉक्टर लाफ़ोली ने कहा, "गंभीर परिस्थितियों में तो समय ही सब कुछ होता है क्योंकि एक घंटे के भीतर ही सब कुछ करना होता है." उन्होंने कहा, "यही वजह है कि मेरे ख़्याल से लोगों के लिए ये कृत्रिम ख़ून बहुत अहम भूमिका अदा कर सकता है." कृत्रिम रक्त अमरीका के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है और इसे विकसित करने का ठीक-ठीक तरीक़ा गुप्त ही रखा गया है. इसके बाद आठ मरीज़ों पर पहली बार कैरोलिंस्का अस्पताल में इसका परीक्षण किया गया है. इसके प्रमुख शोधकर्ता प्रोफ़ेसर बेंग्ट फ़ैगरेल कहते हैं, "ऐसे तो कोई संकेत नहीं हैं कि इस ख़ून का इस्तेमाल ख़ारिज कर दिया जाएगा." उन्होंने कहा, "ये एक अणु है जिसे शरीर का प्रतिरोधी तंत्र ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लेता है." उन्होंने बताया कि मरीज़ों को दिया गया कृत्रिम रक्त आदमी की लाल रक्त कोशिकाओं से बना है. |
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