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पाकिस्तान में क़ैद ब्रितानी नागरिक रिहा
मिर्ज़ा ताहिर
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ताहिर की मौत की सज़ा को कम कर दिया था
पाकिस्तान में एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या के मामले में 18 साल के क़ैद ब्रितानी नागरिक मिर्ज़ा ताहिर हुसैन को रिहा कर दिया गया है.

टैक्सी ड्राइवर की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को मौत की सज़ा सुनाई गई थी. लेकिन गुरुवार को ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने ताहिर की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदलने का आदेश दिया था.

आमतौर पर पाकिस्तान में आजीवन कारावास की सीमा 14 साल की होती है और मिर्ज़ा ताहिर हुसैन उससे ज़्यादा सज़ा काट चुके हैं.

पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री आफ़ताब शेरपाओ ने बीबीसी को बताया कि मिर्ज़ा ताहिर हुसैन को रिहा कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि ताहिर हुसैन अब आज़ाद हैं और जहाँ चाहे जा सकते हैं. वर्ष 1989 में एक टैक्सी ड्राइवर जमशेद ख़ान की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया गया था.

स्पष्टीकरण

हालाँकि ताहिर का कहना था कि उन्होंने आत्मरक्षा के लिए जमशेद ख़ान की हत्या की थी क्योंकि जमशेद ख़ान उनका यौन शोषण करने की कोशिश कर रहे थे.

लीड्स के रहने वाले मिर्ज़ा ताहिर हुसैन की मौत की सज़ा ख़त्म करने के लिए काफ़ी लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा था.

हाल ही में प्रिंस चार्ल्स ने भी अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से अपील की थी कि मिर्ज़ा ताहिर हुसैन को क्षमादान दे दिया जाए.

इसके अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, कई यूरोपीय राजनेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी मिर्ज़ा ताहिर की सज़ा कम करने के लिए कोशिश की थी.

मिर्ज़ा ताहिर हुसैन की रिहाई पर लीड्स के सांसद ग्रेग मुल्होलैंड ने कहा, "ना तो परिवारवालों को और ना ही उन्हें ताहिर हुसैन की रिहाई की आधिकारिक सूचना मिली है. लेकिन ऐसा लग रहा है कि परिवारवालों को 18 वर्ष से जिसका इंतज़ार था, वो अब पूरा हो रहा है."

उन्होंने कहा कि गुरुवार को ताहिर हुसैन की सज़ा कम करना बहुत अच्छी ख़बर थी लेकिन अब उनकी रिहाई की ख़बर तो ऐसी है, जिसका वर्षों से इंतज़ार था.

दरअसल पाकिस्तानी हाई कोर्ट ने मिर्ज़ा ताहिर हुसैन को इस मामले में बरी कर दिया था लेकिन वर्ष 1998 में एक इस्लामी कोर्ट ने ताहिर को मौत की सज़ा सुना दी थी.

वर्ष 2003 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने इस सज़ा को बहाल रखने का आदेश दिया. एक साल बाद इस फ़ैसले की समीक्षा की अपील भी ठुकरा दी गई.

लेकिन सरकार ने कई बार मिर्ज़ा ताहिर हुसैन की मौत की सज़ा को टाला. दूसरी ओर टैक्सी ड्राइवर जमशेद ख़ान के परिवार वालों ने इस फ़ैसले पर निराशा जताई है और कहा है कि वे इसके ख़िलाफ़ अपील करेंगे.

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