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'18 साल के दुस्वप्न का अंत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में ब्रितानी नागरिक ताहिर हुसैन की फाँसी की सज़ा को अब आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया गया है. मिर्ज़ा ताहिर हुसैन के परिवार ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. उनके भाई अमजद का कहना था, "18 साल के दुस्वप्न का अंत होता नज़र आ रहा है". लेकिन जिस टैक्सी वाले की हत्या हुई थी उसके परिवार के लोग बहुत नाराज़ हैं और इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करना चाहते हैं. जमशेद ख़ान के परिवार के वकील मलिक रब नवाज़ नून ने बीबीसी एशियन नेटवर्क से बात करते हुए कहा, "जमशेद ख़ान के परिवार के लोगों ने जब यह ख़बर सुनी तो वे रो पड़े. वे ताहिर को फाँसी पर लटका हुआ देखना चाहते हैं. मैं इस मामले को आगे ले जाऊँगा और उसे सज़ा दिलवा कर रहूँगा". लीड्स के 36 वर्षीय मिर्ज़ा ताहिर हुसैन की सज़ा में बदलाव राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के हस्तक्षेप के बाद आया है. ताहिर हुसैन पर 1989 में एक टैक्सी ड्राइवर जमशेद ख़ान की हत्या का आरोप था. हालाँकि वह हमेशा यही कहते रहे कि उन्होंने यौन संबंध से बचने के लिए आत्मरक्षा में यह हत्या की थी. इस वर्ष के शुरू में इस मामले में दबाव बनाने के लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से मिलने गए यूरोपीय सांसदों के एक शिष्टमंडल के नेता सज्जाद करीम का कहना था, "अब हमारा अगला क़दम होगा उनकी तुरंत रिहाई सुनिश्चित कराना". उनका कहना था, "हमें उम्मीद है मिर्ज़ा बहुत जल्दी वापस अपने घर लीड्स लौट आएँगे". पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस ख़बर की पुष्टि करते हुए कहा कि मिर्ज़ा ताहिर हुसैन को रिहा कर दिया जाएगा और वह अपने घर लौट सकेंगे. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना था, "हमें अभी सरकारी तौर पर कोई सूचना नहीं मिली है लेकिन हम इन रिपोर्टों का स्वागत करते हैं कि मानवीय आधार पर मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है". इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लैट का कहना था कि अभी इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है कि ताहिर अपनी सज़ा पूरी करेंगे या रिहा कर दिए जाएँगे. पाकिस्तान में उम्र क़ैद की सज़ा 25 साल की होती है लेकिन उसमें दिन और रात दोनों गिने जाते हैं इसलिए आमतौर पर वह 12 साल में पूरी हो जाती है. मिर्ज़ा ताहिर हुसैन अब तक 18 साल जेल में गुज़ार चुके हैं और अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी इसी तथ्य को ध्यान में रखकर उनकी सज़ा को उम्र क़ैद में तब्दील किया है. इससे पहले ऐमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार गुटों और ब्रितानी और यूरोपीय सांसदों ने मांग की थी कि हुसैन को माफ़ कर दिया जाए.
समझा जा रहा है कि ब्रिटेन के युवराज चार्ल्स ने भी अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान मिर्ज़ा ताहिर का जीवन बख़्श दिए जाने का आग्रह किया था. प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की ब्रिटेन की यात्रा के दौरान निजी तौर पर यह मामला उठाया था. ताहिर हुसैन के भाई अमजद ने कहा, "हमें सरकारी तौर पर इस फ़ैसले के बारे में कुछ नहीं बताया गया है लेकिन हमारा परिवार ख़ुश है, राहत महसूस कर रहा है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का आभारी है". ताहिर हूसैन को 1996 में उच्च न्यायालय ने इस मामले से बरी कर दिया था लेकिन एक इस्लामी शरिया अदालत ने यह मामला अपने हाथ में ले कर उन्हें मौत की सज़ा सुना दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें ब्लेयर से ज़िंदगी बचाने की गुहार06 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस प्रियदर्शिनी के हत्यारे को मौत की सज़ा30 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ज़ल को फाँसी दिया जाना टला 19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'फाँसी शांति प्रक्रिया के हक़ में नहीं'08 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में चार को फाँसी29 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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