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अफ़ग़ानिस्तान में खाद्य संकट की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने आशंका जताई है कि इस वर्ष सर्दी के मौसम में देश के दक्षिणी हिस्से में खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. एक अनुमान के मुताबिक लगभग 20 लाख लोगों को इस स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. पिछले कुछ समय से देश में अकाल की स्थिति के कारण खाद्यान्न की कमी हो गई है और इसका सीधा असर इस बार सर्दी के मौसम में देखने को मिल सकता है. अफ़ग़ानिस्तान सरकार और संयुक्त राष्ट्र ने इस संकट से निपटने के लिए आपातकालीन मदद की अपील की है. अपील में इस स्थिति से निपटने के लिए चार करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता दिए जाने की बात कही गई है. चिंता इससे पहले जुलाई में अकाल की स्थिति के लिए 7.6 करोड़ डॉलर की मदद की अपील की गई थी. अभी तक इस राशि का आधे से भी कम हिस्सा मिल सका है. देश में इस बार गेहूँ की कम पैदावार हुई है. अफ़ग़ानिस्तान अभी पिछले अकाल से ही पूरी तरह से उबर भी नहीं पाया है. हालांकि इस स्थिति के लिए पिछले कुछ समय से दक्षिणी क्षेत्र में तालेबान के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष को भी इसकी एक वजह बताया जा रहा है. इसके अलावा यह भी देखने में आया है कि अनाज के बजाए अफीम की खेती को बढ़ावा दिया गया है. इधर अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत के गवर्नर ने विकास की योजनाओं में कमी के लिए ब्रिटिश सरकार की आलोचना की है. यहीं ज़्यादातर ब्रितानी फौजें तैनात हैं. गवर्नर मोहम्मद दौद का कहना है कि ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) ने अपना वादा तोड़ा है जिसमें उन्होंने विकास के लिए लाखों डॉलर की सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान में अकाल की चेतावनी 10 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस राजस्थान के 18 हज़ार गाँव सूखाग्रस्त 20 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस अफ़ीम की खेती में कमी29 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'अल क़ायदा के कारण दुर्दिन देखने पड़े'09 मई, 2005 | भारत और पड़ोस महफ़िले अफ़ीम से चढ़ता है चुनावी ख़ुमार08 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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