|
'आरक्षण मामले पर विचार करेगी सरकार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के आर्थिक रुप से संपन्न वर्ग को आरक्षण सुविधा से बाहर रखने के अदालत के फ़ैसले पर विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिए गए अपने फ़ैसले में अनुसूचित जाति और जनजाति के आर्थिक रुप से संपन्न (क्रीमी लेयर) तबके को इस सुविधा से अलग रखने का निर्देश दिया है. हालाँकि अदालत ने आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को सही कहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अदालत के फ़ैसले से उपजी स्थिति का सरकार अध्ययन करेगी. उनका कहना था, "हमें फ़ैसले के बाद की स्थिति पर विचार करना होगा और यह देखना होगा कि क्या विकल्प हैं." समाधान प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा, "हम परस्पर विरोधाभासी और पेचीदा मामलों को निपटाने का उपयुक्त रास्ता खोज निकालेंगे." इस बीच निजी क्षेत्र के उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों को 27 फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने के मामले पर मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि लगभग सभी राज्यों ने इस पर सहमति जताई है. राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा, "कुछ राज्यों ने खुद ही इस दिशा में क़ानून बनाए हैं. जहाँ ये क़ानून नहीं हैं, वहाँ की सरकारों ने कहा है कि वे केंद्रीय क़ानून लागू करेंगे." | इससे जुड़ी ख़बरें पदोन्नति में आरक्षण जायज़:सुप्रीम कोर्ट19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विदेशी विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण'20 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामान्य वर्ग के अवसर नहीं घटेंगे'31 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस जंतर मंतर और लोकतंत्र27 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश 25 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण के फ़ैसले के विरोध में छात्र उतरे22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण विधेयक के मसौदे को मंज़ूरी21 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||