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शनिवार, 14 अक्तूबर, 2006 को 16:26 GMT तक के समाचार
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ग्रामीण बैंक को नोबेल पर लंदन में ख़ुशी

प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस
मोहम्मद यूनुस ग्रामीण बैंक के संस्थापक हैं
लंदन के पूर्वी इलाक़े व्हाइट चेपल और ब्रिक लेन में इन दिनों जश्न का माहौल है और यहाँ के लोगों की खुशी की वजह प्रोफ़ेसर मोहम्मद युनुस और उनके गामीण बैंक को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार का दिया जाना है.

पूर्वी लंदन के इन इलाक़ों में बांग्लादेशी मूल के लोग भारी संख्या में आबाद हैं और इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिनके रिश्तेदारों को किसी न किसी तरह बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक का सहयोग मिला जिससे उनको अपने कठिन दौर में खुशहाली की किरण नज़र आई.

बांग्लादेश के सिलहट से ताल्लुक रखने वाले अल्ताफ हुसैन लंदन के ब्रिक लेन स्थित एक ट्रैवेल एजेंसी में काम करते हैं.

वह बताते हैं कि कैसे उनके तंगहाल रिश्तेदारों को ग्रामीण बैंक की माइक्रो क्रेडिट योजना के तहत मुर्ग़ी फ़ार्म शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग मिला.

उनके ये रिशतेदार सिलहट के सुदूर ज़कीगंज गांव में अपना कारोबार कर रहे हैं. आज ये आर्थिक रूप से काफी हद तक स्वावलंबी हैं.

अल्ताफ कहते हैं, "हालांकि बैंक ने तो कोई बहुत बड़ी रक़म नहीं दी लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए यह सहायता मँजधार में किसी किश्ती से कम नहीं थी क्योंकि महाजनों से मिलने वाले क़र्ज़ सहायता के बजाय ग़रीबों को अपने आर्थिक चंगुल में फंसाने वाले होते हैं.

अल्ताफ कहते हैं आज यह सुनकर काफ़ी खुशी हो रही है कि हमारा संबंध किसी न किसी तरह ग्रामीण बैंक से है जिसे दुनिया का प्रतिष्ठत सम्मान मिला है.

अब्दुल नूर
अब्दुल नूर पूर्वी लंदन में रहते हैं

लंदन के व्हाइट चैपेल इलाक़े में बांग्लादेश के खुर्शीद अख़्तर के परिवार ने भी ग्रामीण बैंक की माइक्रो क्रेडिट योजना का लाभ उठाया था.

ख़ुर्शीद की माँ ने कोई दस साल पहले छोटा सा क़र्ज़ लेकर आर्थिक तंगी से जूझते अपने कुनबे को उबारा था.

ख़ुर्शीद बताते हैं कि ये योजनाएँ उन ग़रीबों के लिए काफ़ी लाभकारी हैं जिन्हें किसी और रास्ते से सहयोग की उम्मीद नहीं है.

दो साल पहले प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस लंदन आए थे तो उन्होंने विशेष तौर पर पूर्वी लंदन मस्जिद की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं का अध्ययन किया था.

मस्जिद प्रबंधन से जुड़े अब्दुल नूर बताते हैं कि वह पूर्वी लंदन मस्जिद की सामाजिक और रोज़गार संबंधी गतिवधियों से ख़ासे प्रभावित हुए थे और बांग्लादेश के लिए इसे रोल माडल क़रार दिया था.

प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस के इस वक्तव्य को इस लिए महत्वपूर्ण माना गया था क्योंकि मस्जिदों का इस्तेमाल आमतौर पर सिर्फ़ इबादत के लिए ही किया जाता है.

अब्दुल नूर बताते हैं कि प्रोफ़ेसल मोहम्मद यूनूस ने इबादत के ज़रिए भी सामाजिक- आर्थिक विकास का मॉडल तैयार करने में पूर्वी लंदन मस्जिद प्रबंधन को दिशा दिखाई थी जो हमारे लिए काफी कारगर साबित हुआ है.

पूर्वी लंदन मस्जिद प्रबंधन एशियाई मूल के बेरोज़गारों के लिए रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता करता है.

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