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मंगलवार, 03 अक्तूबर, 2006 को 14:52 GMT तक के समाचार
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मोबाइल फ़ोन पर छिड़ी ज़ोरदार बहस

कॉलेजों में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल आम है
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल-कॉलेजों में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने पर लगे प्रतिबंध को और सख़्ती से लागू करने की घोषणा की है.

राज्य सरकार की इस घोषणा को लेकर विरोध शुरु हो गया है, कई छात्र संगठनों ने सरकार से इस प्रतिबंध को वापस लेने की माँग की है.

छात्रों का तर्क है कि मोबाइल फ़ोन के कारण ऐसे छात्र-छात्राएँ हमेशा अपने परिजनों के संपर्क में रहते हैं जो दूसरी जगहों से पढ़ने के लिए आते हैं. इसके अलावा लगातार बढ़ रहे अपराध की रोकथाम में भी मोबाइल फ़ोन सहायक होता है.

लेकिन राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर कहते हैं, “स्कूल-कॉलेज में मोबाइल फ़ोन के कारण इतनी अराजकता फैल रही थी कि आप इसका अनुमान नहीं लगा सकते. वैसे भी स्कूल-कॉलेज में बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं, बात करने के लिए नहीं.”

हालांकि कॉलेज में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी शिक्षा मंत्री के तर्क से सहमत नहीं हैं.

विरोध

बस्तर के ग्रामीण इलाके से रायपुर आ कर पढ़ने वाली इंजीनियरिंग की छात्रा आशा कहती हैं, “यह अजीब बात है कि एक तरफ़ तो हमें टेक्नालॉजी के साथ कदम-ताल करने का उपदेश दिया जाता है, दूसरी मोबाइल फ़ोन पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है. ब्रिटेन में तो 12 साल की उम्र के 91 प्रतिशत बच्चों के पास मोबाइल फ़ोन है.”

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के राघवेंद्र सिंह का कहना है कि मोबाइल फ़ोन को कक्षा में सायलेंट रखने को कहा जाए तो समझ में आता है, लेकिन उस पर प्रतिबंध का आदेश 'तुगलकी फ़रमान' है.

विरोध
 यह अजीब बात है कि एक तरफ़ तो हमें टेक्नालॉजी के साथ कदम-ताल करने का उपदेश दिया जाता है, दूसरी मोबाइल फ़ोन पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है. ब्रिटेन में तो 12 साल की उम्र के 91 प्रतिशत बच्चों के पास मोबाइल फ़ोन है
आशा, इंजीनियरिंग की छात्रा

अभिभावकों की सुनें तो लगता है कि उनमें से भी ज़्यादातर सरकार के साथ हैं. अधिकांश अभिभावक स्कूल-कॉलेज में मोबाइल फ़ोन को प्रतिबंधित करने के पक्ष में हैं.

बिलासपुर की निर्मला के दोनों बच्चे अभी स्कूल में ही हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं. वे कहती हैं,“ छोटे शहरों में रहने वाले हम लोगों ने तो अपनी पूरी पढ़ाई तक कभी फ़ोन का भी इस्तेमाल नहीं किया. आज स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मोबाइल फ़ोन ज़रुरत नहीं, स्टेटस सिंबल का मामला है.”

छात्रों के लिए मोबाइल फ़ोन की नई-नई योजना लागू करने वाला भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल भी राज्य सरकार के इस फ़ैसले से संशय में है.

केंद्र सरकार के इस उपक्रम ने छात्रों को मोबाइल फ़ोन के कनेक्शन और उसके मासिक किराए में आकर्षक छूट का प्रावधान रखा है.

बीएसएनएल को आशंका है कि राज्य सरकार की ओर से स्कूल-कॉलेज में मोबाइल फ़ोन पर प्रतिबंध लगाने से उसके कारोबार पर आंशिक असर पड़ेगा लेकिन कोई भी राज्य सरकार के ख़िलाफ़ टिप्पणी नहीं करना चाहता.

बीएसएनएल के महाप्रबंधक (वाणिज्य) मनोज मिश्रा कहते हैं, “हमने तो विद्यार्थियों को मोबाइल फ़ोन में जो छूट दी है, उसका उद्देश्य यही था कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी अपने परिवार के संपर्क में रहें. विद्यार्थियों को मिलने वाली छूट स्कूल-कॉलेज में फ़ोन के इस्तेमाल करने के लिए नहीं थी.”

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