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'सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर बहस हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद का कहना है कि राम मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी बहस होना चाहिए और उनकी पार्टी इस सवाल को उठाएगी. भाजपा नेता बीबीसी हिंदी रेडियो के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात, बीबीसी के साथ में लोगों के सवाल का जवाब दे रहे थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या कारण है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की पैरवी करने वाली पार्टी वहाँ पर केंद्र में अपने छह वर्षों के कार्यकाल के दौरान भी मंदिर नहीं बना पाई तो उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने बताया, "मैं उन दिनों देश का विधिमंत्री था जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान सभा के पाँच न्यायाधीशों ने कहा कि हम अतिरिक्त ज़मीन राम मंदिर न्यास समिति को दे सकते हैं.जब उसपर कार्यवाही शुरू हुई तो दो न्यायाधीशों ने कहा कि कुछ नहीं हो सकता. ऐसे में हम आपको क्या जवाब दें." उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "राम मंदिर न्यास को अतिरिक्त भूमि दिए जाने के मसले पर कुछ कठमुल्लाओं के दबाव में पाँच न्यायाधीशों के फ़ैसले को दो न्यायाधीशों की आपत्ति के बाद रोक दिया जाता है. इसलिए मुझे लगता है कि इस मसले का स्थाई समाधान कोर्ट के माध्यम से नहीं खोजा जा सकता है." विपक्ष की भूमिका उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभा रही है और पार्टी ने जो मुद्दे उठाए हैं उन्हें देश की जनता ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने वर्तमान केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "किसी भी सरकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वो देश के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराए. वर्तमान सरकार ऐसा कर पाने में विफल रही है. लोग असुरक्षित हैं और सरकार सुरक्षा देने के बजाय वोटों की राजनीति कर रही है." उन्होंने कहा कि इसके अलावा महंगाई भी एक गंभीर प्रश्न है जिसपर यह सरकार विफल रही है. लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है और देश के किसान आत्महत्या कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश के लोगों के विश्वास को फिर से हासिल कर पाने में सफल होगी क्योंकिं पार्टी जिस रास्ते पर चल रही है वो सही है और उसका लक्ष्य स्पष्ट है. उन्होंने राजनीतिक दलों में परिवारवाद को बढ़ावा देने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम और भाजपा ही दो ऐसे दल हैं जिन्होंने ख़ुद को इससे दूर रखा है. |
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